कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के प्रदर्शन पर बोले उमर अब्दुल्ला: 'कोई भी बेघर नहीं, यह विरोध का चलन बन गया है'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मी-री पंडित कर्मचारियों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन दावों को खारिज…
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मी-री पंडित कर्मचारियों के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया कि कर्मचारियों के पास रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है और कहा कि उनमें से कोई भी बेघर नहीं है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा, "कौन सा कश्मीरी पंडित बिना घर के है? उनमें से कोई भी बेघर नहीं है। जहां भी ट्रांजिट आवास तैयार किए गए हैं, उन्हें घर दिए गए हैं।" उन्होंने आगे कहा, "बिना किसी कारण के विरोध करना और दूसरी चीजें करना एक चलन बन गया है। अगर किसी को घर की जरूरत है तो हमें बताएं। बाकी लोगों को पहले ही घर दिए जा चुके हैं।"
कर्मचारियों की सुरक्षा चिंता और मांगें
दूसरी ओर, प्रवासी कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें घाटी में काम करते हुए गंभीर सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि उन्हें 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (यूएलसी) जैसे आतंकवादी संगठनों से धमकियां मिल रही हैं। खबरों के मुताबिक, इन संगठनों ने प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और शिक्षकों की 'हिट लिस्ट' भी जारी की थी।
कर्मचारियों ने चिंता जताई है कि हाल के धमकी भरे पत्रों में उनके नाम, पते, फोन नंबर और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी निजी जानकारी लीक हो गई है, जिससे डर और बढ़ गया है। इसी वजह से वे लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सुरक्षा स्थिति सुधरने तक जम्मू में ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी) का भी दरवाजा खटखटाया है।
सरकार का पक्ष और आवास व्यवस्था
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि ज्यादातर कश्मीरी पंडित कर्मचारी कई कारणों का हवाला देते हुए घाटी से बाहर पोस्टिंग चाहते हैं। सरकार का कहना है कि प्रवासी कर्मचारियों के लिए घाटी के विभिन्न जिलों में गेट वाली सुरक्षित कॉलोनियां बनाई गई हैं। इन बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षा बलों की है। कर्मचारियों की एक बड़ी समस्या यह भी है कि उनके परिवार जम्मू और अन्य जगहों पर रहते हैं, जबकि उन्हें घाटी में इन सुरक्षित आवासों में अकेले रहना पड़ता है।
इनपुट: IANS



