जनऔषधि केंद्रों से देशवासियों को बड़ी राहत, 12 सालों में दवाओं पर बचाए ₹45,000 करोड़
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) देश के आम नागरिकों के लिए दवाओं पर होने वाले खर्च को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में लोगों ने ब्रांडेड…
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) देश के आम नागरिकों के लिए दवाओं पर होने वाले खर्च को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में लोगों ने ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाएं खरीदकर लगभग 45,000 करोड़ रुपये की कुल बचत की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।
केंद्र सरकार के मुताबिक, इस योजना से परिवारों का दवाओं पर होने वाला खर्च काफी कम हुआ है। देशभर में अब तक 20,149 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जो सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
दवाओं और उपकरणों की विस्तृत श्रृंखला
इन जनऔषधि केंद्रों पर 2,110 प्रकार की दवाएं और 315 तरह के सर्जिकल सामान व चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवाओं के साथ-साथ पोषक पूरक (न्यूट्रास्यूटिकल्स) भी शामिल हैं। लैब रिएजेंट और वैक्सीन को छोड़कर, 'राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची' में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इन केंद्रों पर मिलती हैं।
देशव्यापी पहुंच और निगरानी
यह योजना देश के 784 में से 776 जिलों तक अपनी पहुंच बना चुकी है। योजना को लागू करने वाली एजेंसी 'फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया' (PMBI) इन केंद्रों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन करती है। दवाओं की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी की जाती है। केंद्र संचालकों को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं (100 सबसे ज़्यादा मांग वाली और 100 बाज़ार में तेज़ी से बिकने वाली) का पर्याप्त स्टॉक रखने के लिए मासिक प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
लोगों में जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए PMBI केंद्रीय संचार ब्यूरो, पत्र सूचना कार्यालय (PIB), मायगॉव और माय भारत जैसे मंचों के साथ मिलकर अभियान भी चलाती है।
इनपुट: IANS



