गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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गगनयान की राह में इसरो का एक और सफल कदम: LVM3 के शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को मजबूती देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसरो ने अपने CE20 क्रायोजेनिक…

गगनयान की राह में इसरो का एक और सफल कदम: LVM3 के शक्तिशाली क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण
(फोटो: IANS)

भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों को मजबूती देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसरो ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 'फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट' सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण इंजन की बढ़ी हुई क्षमता (अपरेटेड थ्रस्ट) 220 किलोन्यूटन (kN) पर किया गया।

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यह सफल परीक्षण 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में हुआ। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य आने वाले LVM3 मिशनों के लिए इंजन के प्रदर्शन को उड़ान से पहले सत्यापित करना था। LVM3 इसरो का सबसे भारी लॉन्च व्हीकल है और भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान (गगनयान) जैसे महत्वपूर्ण मिशनों के लिए बेहद अहम है।

टेस्ट की खासियत और गगनयान कनेक्शन

जिस खास इंजन का परीक्षण किया गया, उसे भविष्य के LVM3 मिशन के ऊपरी हिस्से, यानी C32 अपर स्टेज के लिए तैयार किया गया है। इसरो ने बताया कि इसी परीक्षण के दौरान गगनयान मिशन के लिए बनाए गए एक और महत्वपूर्ण हिस्से का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। यह हिस्सा 'एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल' (LTPM) है, जिसे C32 स्टेज के लिए ही डिजाइन किया गया है।

यह सफलता इसरो के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत वह भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए उन्नत लॉन्च सिस्टम विकसित कर रहा है। इसरो का ध्यान अगली पीढ़ी के लॉन्च वाहनों, मानव अंतरिक्ष मिशन, चंद्र और ग्रह अन्वेषण के साथ-साथ प्रस्तावित 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' पर केंद्रित है।

भविष्य की दिशा और निजी क्षेत्र की भूमिका

इसरो ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे सुधारों का लक्ष्य एक व्यापक राष्ट्रीय इकोसिस्टम बनाना है। इसमें निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थान इसरो के प्रयासों में सहयोग करेंगे, जिससे इसरो खुद उन्नत अनुसंधान, नई तकनीकों और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

इनपुट: IANS

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