रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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ईरान-अमेरिका समझौता उल्लंघन: खामेनेई ने कहा - ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मोल नहीं

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि हालिया शांति समझौते का उल्लंघन कर अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर "अमूल्य और अमान्य" हैं। ईरानी लोगों…

ईरान-अमेरिका समझौता उल्लंघन: खामेनेई ने कहा - ट्रंप के हस्ताक्षर का कोई मोल नहीं
(फोटो: IANS)

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि हालिया शांति समझौते का उल्लंघन कर अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर "अमूल्य और अमान्य" हैं। ईरानी लोगों के नाम अपने एक संबोधन में उन्होंने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अगर वाशिंगटन ने युद्ध भड़काने वाली हरकतें जारी रखीं तो उसे ईरान से कभी न भूलने वाला सबक मिलेगा।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य हमलों के बीच आया है। खामेनेई ने कहा, "अपराध और वादे तोड़ने का यह बुरा अनुभव अमेरिका के झूठ बोलने और उसके बेतुके, गैर भरोसेमंद प्रकृति का एक और पक्का सबूत है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका ने अपना "असली और बेपर्दा चेहरा" दिखाया है।

समझौते का उल्लंघन और ईरान का रुख

जिस समझौता ज्ञापन (MOU) का जिक्र हो रहा है, उस पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 जून को हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते के लिए बातचीत करनी थी। हालांकि, ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने शनिवार को पुष्टि की कि ईरान ने अमेरिका के साथ एमओयू के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना बंद कर दिया है।

एक सरकारी टीवी इंटरव्यू में गरीबाबादी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को "असल में तोड़ा है या रोक दिया है"। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ईरान का ध्यान अपने बचाव पर है और बातचीत की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर वे (अमेरिकी) समझदार हैं, तो उन्हें दूसरे तरीके चुनने चाहिए।"

क्षेत्र में बढ़ते सैन्य हमले

यह तनाव सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। वाशिंगटन का तर्क है कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करने के लिए थे।

इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र के कई देशों और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों व ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले किए हैं। इसी क्रम में शनिवार को कुवैत और बहरीन ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की तरफ से किए गए ताजा हवाई हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है।

इनपुट: IANS

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