गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान-रूस संबंध: पेजेश्कियन और पुतिन ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर दिया जोर

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने एक फोन वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS की…

ईरान-रूस संबंध: पेजेश्कियन और पुतिन ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर दिया जोर
(फोटो: IANS)

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने एक फोन वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को हुई इस बातचीत में दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

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ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान और रूस के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग जारी रखना और उसे बढ़ाना साझा हितों के अनुकूल है।

कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन

इस बातचीत में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मॉस्को और तेहरान के बीच करीबी रिश्ते और सहयोग बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय घटनाक्रमों के बावजूद, रूस और ईरान के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौते के तहत साझेदारी जारी है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि पुतिन ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने तथा पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए कुछ देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रूस ऐसी कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

यह बातचीत उस पृष्ठभूमि में हुई है जब क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ भी सख्त कर दी थी।

बाद में, 8 अप्रैल को संघर्षरत पक्षों के बीच एक युद्धविराम लागू हुआ। इसके बाद 18 जून को ईरान और अमेरिका ने एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना था। इस एमओयू के तहत 17 अगस्त तक 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुंचना था, लेकिन बढ़ते तनाव के कारण इसमें कोई विशेष प्रगति नहीं हो सकी।

इनपुट: IANS

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