अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप के बाद भी अगली सरकार को विरासत में मिल सकती है यह चुनौती- पूर्व अधिकारी
व्हाइट हाउस के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने आशंका जताई है कि ईरान के साथ अमेरिका का मौजूदा टकराव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाद भी जारी रह सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अधिकारी का…
व्हाइट हाउस के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने आशंका जताई है कि ईरान के साथ अमेरिका का मौजूदा टकराव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाद भी जारी रह सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अधिकारी का मानना है कि यह एक पुरानी समस्या है जिसे अगली अमेरिकी सरकार को भी संभालना पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य, दोनों तरह का दबाव बनाए रखने की बात कह रहा है।
मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका के मामलों के पूर्व कोऑर्डिनेटर ब्रेट मैकगर्क ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि उन्हें ईरान के साथ किसी बड़े और निर्णायक समझौते का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा, "अगर मुझे अनुमान लगाना हो, तो यह मामला ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिर तक चलता रहेगा और फिर अगले राष्ट्रपति को भी ईरान की इस पुरानी समस्या से निपटना होगा।" मैकगर्क ने इस बात पर जोर दिया कि जिमी कार्टर के समय से लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान की व्यवस्था से जुड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है।
लंबे संघर्ष की आशंका
ब्रेट मैकगर्क ने ईरान के साथ लंबे समय तक आर्थिक दबाव, बीच-बीच में सैन्य टकराव और कुछ समय के लिए संघर्ष विराम की संभावना जताई है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की राजनीतिक व्यवस्था अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव नहीं करती या बिखर नहीं जाती, तब तक इस संघर्ष का कोई स्पष्ट अंत नज़र नहीं आता। उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति आने में अभी काफी समय लगेगा।"
उनके मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 को इज़रायल पर हमास के हमले के बाद से मध्य-पूर्व में शक्ति का संतुलन 'बुनियादी तौर पर' बदल गया है। मैकगर्क ने यह भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक और जटिल मुद्दा है, जिस पर कोई बड़ा समझौता होना मुश्किल लगता है। उनका मानना है कि तेहरान के नेता परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंचने को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी के रूप में देखते हैं।
प्रशासन का दोहरा दबाव
दूसरी ओर, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने पुष्टि की है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के मामले में सैन्य और कूटनीतिक, दोनों रास्ते खुले रखे हुए है। उन्होंने सीबीएस न्यूज को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, "हम अगली सरकार के लिए परमाणु हथियारों से लैस ईरान छोड़कर नहीं जा सकते।"
जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई बढ़ाई जा सकती है, तो उन्होंने राष्ट्रपति की योजनाओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति "हमेशा अलग-अलग संभावित हालात के लिए तैयारी करते हैं और साथ ही बातचीत भी करते रहते हैं।"
संघर्ष का राजनीतिक और आर्थिक असर
अमेरिका में इस संघर्ष का राजनीतिक और आर्थिक असर भी दिख रहा है, खासकर जब मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं। अमेरिकी मीडिया के एक सर्वे के अनुसार, 10 में से 9 मतदाता मानते हैं कि ईरान संघर्ष के कारण अमेरिका में गैस और तेल की कीमतें बढ़ी हैं। ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्वीकार किया कि खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति में रुकावट न आने की कोई गारंटी नहीं है, हालांकि उन्होंने आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऊर्जा की कीमतों पर पड़ने वाले असर को जानते थे, लेकिन उन्होंने वह किया जो उन्हें सही लगा।
इनपुट: IANS



