गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव, कहा - ज़रूरत पड़ने पर दुश्मन से पहले करेंगे हमला

ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरानी सेना के एक शीर्ष प्रवक्ता के अनुसार, अब देश ज़रूरत पड़ने पर दुश्मन की किसी भी संभावि…

ईरान की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव, कहा - ज़रूरत पड़ने पर दुश्मन से पहले करेंगे हमला
(फोटो: IANS)

ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरानी सेना के एक शीर्ष प्रवक्ता के अनुसार, अब देश ज़रूरत पड़ने पर दुश्मन की किसी भी संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए 'पहले हमला' करने की नीति पर काम करेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बयान अमेरिका और इज़रायल के साथ हालिया सैन्य टकरावों के बाद आया है।

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ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने फार्स न्यूज़ एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में इस नई रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने पहले भी दुश्मन के खिलाफ इस तरह की 'प्री-एम्प्टिव' यानी पहले से की जाने वाली सैन्य कार्रवाई की है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ज़रूरत, तुरंत कार्रवाई और हमले के अनुपात जैसे सिद्धांतों का पालन करते हुए ऐसा करना 'वैध' माना जाता है।

हालिया सैन्य टकराव और नई रणनीति

अकरमिनिया ने बताया कि इस नई आक्रामक रणनीति के तहत कई सैन्य अभियान चलाए गए हैं। इनमें जुलाई के अंत में जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर किया गया मिसाइल हमला शामिल है। उन्होंने दावा किया, "इस हमले से हमने उनसे पहल करने का मौका छीन लिया और वे कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं रहे।" इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में उन समूहों के ठिकानों पर भी कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें ईरान 'क्रांति विरोधी और अलगाववादी' मानता है।

मिसाइल क्षमता बढ़ाने पर ज़ोर

ईरानी सेना के प्रवक्ता ने अमेरिका द्वारा संभावित ज़मीनी हमले की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका ऐसा करने की हिम्मत करेगा। उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका और इज़रायल के साथ हुए युद्ध के बाद ईरान ने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। अकरमिनिया के मुताबिक, "दुश्मन ने अपनी सेनाओं को ईरान के तटों से करीब एक हज़ार किलोमीटर दूर तैनात किया है, इसलिए हमें अपनी मिसाइलों की रेंज निश्चित तौर पर बढ़ानी होगी।" उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान अपनी मिसाइलों की गति और सटीकता में लगातार सुधार कर रहा है और आने वाली मिसाइलें पहले से ज़्यादा तेज़ और सटीक होंगी।

पृष्ठभूमि और संघर्ष विराम

यह बयान इस साल की शुरुआत में हुए गंभीर सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में आया है। 28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने भी इज़रायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी। इसके बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ और 18 जून को ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जिसका उद्देश्य सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना था। हालांकि, 17 अगस्त को 60-दिवसीय समय सीमा समाप्त होने तक दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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