होर्मुज जलडमरूमध्य: तनाव के बीच ईरान ने किसी भी समझौते की बात खारिज की, अमेरिका को दी चेतावनी
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी समझौते की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया…
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी समझौते की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका की 'शत्रुतापूर्ण' गतिविधियां जारी रहेंगी, तब तक यह महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद रहेगा।
यह घटनाक्रम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईरान के साथ एक संभावित समझौते पर काम चल रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा था कि उन्होंने फिलहाल ईरान पर हमले की योजना को रोक दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति के साथ तैयार था, लेकिन ईरान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों के अनुरोध पर कार्रवाई नहीं की।
समझौते की खबरों का खंडन
अमेरिकी मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि कतर और अमेरिका की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ है, जिसे ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने मंजूरी दे दी है। इजरायल के चैनल 12 न्यूज ने भी ऐसी ही रिपोर्ट दी थी। हालांकि, ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' ने ईरानी वार्ता टीम के एक करीबी सूत्र के हवाले से इन दावों का तुरंत खंडन कर दिया।
ईरान का कड़ा रुख
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि तेहरान अपने हर 'दुश्मन' की धमकी को गंभीर और वास्तविक मानता है। उन्होंने लिखा, "हम न तो हैरान हैं और न ही चुप बैठेंगे। हम हर खतरे को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत को और विकसित करने का आधार मानते हैं।"
एक सैन्य सूत्र के हवाले से फार्स न्यूज ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने दिया जाएगा, जो ईरान द्वारा तय मार्गों का उपयोग करेंगे और जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना से अनुमति मिलेगी। सूत्र ने चेतावनी दी कि अन्य रास्ते सुरक्षित नहीं हैं और इस जलमार्ग को लेकर ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इनपुट: IANS



