ईरान 1979 की क्रांति के बाद सबसे मुश्किल दौर में, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने प्रतिबंधों और सैन्य दबाव का किया ज़िक्र
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने देश के मौजूदा हालात को 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे मुश्किल समय बताया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अपने शपथ ग्रहण की दूसरी वर्षगांठ के मौके…
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने देश के मौजूदा हालात को 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे मुश्किल समय बताया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अपने शपथ ग्रहण की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर बुधवार को उन्होंने कहा कि देश पर प्रतिबंधों और सैन्य टकराव का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) को दिए एक इंटरव्यू में पेजेश्कियन ने कहा, “अभी हम जिन हालात का सामना कर रहे हैं, वे क्रांति के बाद के इतिहास के सबसे मुश्किल हालात हैं।” उन्होंने कहा कि पहले प्रतिबंध थे जो बढ़ते गए, फिर बैंकों और वित्तीय लेन-देन पर पाबंदी लगाई गई और इससे भी संतुष्ट न होने पर “उन्होंने जंग छेड़ दी”।
बाहरी दबाव और अमेरिकी प्रतिक्रिया
ईरानी राष्ट्रपति का मानना है कि इस बाहरी दबाव का असल मक़सद सरकार के प्रति जनता के समर्थन को कमज़ोर करना है। उन्होंने दावा किया, “वे जो भी योजना बना रहे हैं और जो भी दबाव डाल रहे हैं, वह लोगों को नाराज़ करने और उन्हें विरोध के लिए उकसाने के लिए है।” पेजेश्कियन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय एकता की वजह से ही ईरान अब तक इन दबावों का सामना कर पाया है।
इसी बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ किसी संभावित समझौते की प्रक्रिया को मुश्किल बताया है। बुधवार शाम फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ईरानी शासन-तंत्र बिखरा हुआ है, जिससे बातचीत लंबी खिंच सकती है। वेंस ने कहा, “हमारा काम इससे निपटना है और अमेरिकी लोगों के लिए... सबसे अच्छा नतीजा पाना है। तेल की कीमतें नीचे आएंगी और नीचे ही रहेंगी। ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा और अमेरिका एक मजबूत स्थिति में होगा।”
शिपिंग रूट और यात्राओं पर स्पष्टीकरण
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट से एक सुरक्षित कमर्शियल शिपिंग रूट बनाने पर बातचीत के अंतिम चरण में हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश प्रस्तावित रूट के भौगोलिक समन्वय पर सहमत हो गए हैं और जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं। यह बातचीत पिछले दो महीनों से चल रही है।
इसके अलावा, ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट किया है कि इस हफ़्ते के अंत में तेहरान के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की पाकिस्तान या कतर जाने की कोई योजना नहीं है।
इनपुट: IANS



