अमेरिका: हैती के 3.5 लाख प्रवासियों पर निर्वासन का संकट, अदालत ने कानूनी सुरक्षा हटाई
अमेरिका में रह रहे हैती के लगभग 3.5 लाख प्रवासियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। एक संघीय अदालत के नए फैसले के बाद इन लोगों से अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS) छिन सकता है, जिससे उन पर…
अमेरिका में रह रहे हैती के लगभग 3.5 लाख प्रवासियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। एक संघीय अदालत के नए फैसले के बाद इन लोगों से अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS) छिन सकता है, जिससे उन पर निर्वासन का खतरा पैदा हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हैती खुद गंभीर हिंसा, भूख और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जून में दिए गए एक निर्णय के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा था कि टीपीएस से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती। इसी आधार पर डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया की जिला अदालत की न्यायाधीश एना सी. रेयेस ने बुधवार को अपना पुराना रोक आदेश वापस ले लिया, जिससे ट्रंप प्रशासन के टीपीएस खत्म करने के फैसले का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS)?
टेम्पररी प्रोटेक्टेड स्टेटस (TPS) एक अमेरिकी व्यवस्था है जो उन देशों के नागरिकों को अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने और काम करने की अनुमति देती है, जो युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी अन्य गंभीर संकट का सामना कर रहे हों। यह दर्जा लाभार्थियों को निर्वासन से भी बचाता है।
फैसले का प्रभाव और पृष्ठभूमि
पहले न्यायाधीश रेयेस ने ही ट्रंप प्रशासन के हैती के नागरिकों की टीपीएस सुरक्षा समाप्त करने के फैसले पर रोक लगाई थी, जिसे एक संघीय अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने निचली अदालत के हाथ बांध दिए, जिसके चलते 2 फरवरी 2026 तक लगाई गई रोक अब प्रभावी नहीं रही।
प्रवासी अधिकार संगठन FWD.us के अनुसार, टीपीएस के तहत अमेरिका में लगभग दो लाख हैती नागरिक कानूनी रूप से काम कर रहे हैं। ये लोग स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सेवा, वेयरहाउसिंग और खुदरा व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
हैती के मौजूदा हालात
विडंबना यह है कि अमेरिकी विदेश विभाग खुद हैती को अपनी यात्रा परामर्श सूची में सबसे खतरनाक 'लेवल-4' श्रेणी में रखता है। विभाग ने वहां अपराध, अपहरण, सामाजिक अशांति और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की हुई है। ऐसे में इन प्रवासियों का भविष्य और भी चिंताजनक हो गया है।
इनपुट: IANS



