होरमुज़ जलडमरूमध्य: तनाव घटाने के लिए ईरान ने अमेरिका को दिया बातचीत का प्रस्ताव
ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव कम करने की दिशा में एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को एक प्रस्ताव दिया है…
ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव कम करने की दिशा में एक नई कूटनीतिक पहल सामने आई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें सात दिनों के भीतर बातचीत शुरू करने की पेशकश की गई है। इस बातचीत का मकसद बड़े पैमाने पर चल रहे संघर्ष को समाप्त करना और होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों को इस प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव इसी हफ़्ते मध्यस्थों के ज़रिए हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के दौरान अमेरिकी अधिकारियों तक पहुँचाया गया। हालाँकि, द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जब इस पर प्रतिक्रिया के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से तत्काल कोई जवाब नहीं आया।
प्रस्ताव की शर्तें और पुराना समझौता
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान की शर्तें काफी हद तक उस समझौता ज्ञापन (एमओयू) जैसी ही हैं, जिस पर दोनों देश जून में सहमत हुए थे। उन्होंने कहा, "हमने जो शर्तें रखी हैं, उनमें कुछ भी नया नहीं है।" उल्लेखनीय है कि तेहरान ने जून में बनी सहमति का अर्थ यह निकाला था कि इसमें होरमुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता दी गई है। हालांकि, अमेरिका और इस क्षेत्र में उसके सहयोगी देश ईरान के इस रुख को लगातार खारिज करते रहे हैं।
क्यों अहम है होरमुज़ जलडमरूमध्य?
होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। आम तौर पर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में इज़रायल और अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद ईरान ने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछा दी थीं। इसके बाद यहाँ से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई, जिसका असर दुनियाभर में ऊर्जा की कीमतों पर भी पड़ा।
दोनों देशों का मौजूदा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क की बात स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान संघर्ष खत्म करने के लिए समझौते पर पहुँच सकता है या फिर उसे 'पूरी तरह खत्म होने' का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बुधवार को अपने संबोधन में कहा, "ईरान को ताकतवर होना चाहिए, ताकि उसे धमकाया न जा सके और उसके भविष्य को खतरे में न डाला जा सके।" उन्होंने यह भी साफ किया, "हम बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन ताकत के दम पर बात मनवाने की भाषा स्वीकार नहीं करेंगे।"
दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी गहरा विवाद है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका युद्ध में इसलिए शामिल हुआ ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सके। इसके जवाब में पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा, लेकिन देश को 'शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक' विकसित करने का अधिकार है।
इनपुट: IANS



