ईरान और अमेरिका में तनाव बढ़ा: IRGC का जॉर्डन-कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसने अमेरिका की "आक्रामक कार्रवाइयों" के जवाब में…
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसने अमेरिका की "आक्रामक कार्रवाइयों" के जवाब में जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, IRGC ने यह भी चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बंद नहीं करता, होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षित नहीं रहेगा।
अपने आधिकारिक समाचार चैनल 'सेपाह न्यूज' पर जारी बयानों में, IRGC ने बताया कि इन हमलों का मकसद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाना था। संगठन के अनुसार, जॉर्डन के बंदरगाह शहर अकाबा के एक हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें अमेरिकी बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर III और बोइंग पी-8 पोसीडॉन विमानों को भारी नुकसान पहुँचा।
कुवैत में भी अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
ईरान ने दावा किया कि कुवैत में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। IRGC के मुताबिक, एक ड्रोन हमले में कुवैत स्थित अमेरिकी प्रारंभिक चेतावनी रडार प्रणाली को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा, अली अल सलेम एयर बेस पर एक गोदाम पर भी हमला हुआ, जिसमें उपकरणों और विमान के पुर्जों को रखा गया था। इसी बेस पर MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगर को भी निशाना बनाया गया, जिससे कई मानवरहित हवाई वाहनों (UAV) में आग लग गई।
अमेरिका की जवाबी कार्रवाई
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई की जानकारी दी है। सेंटकॉम ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर बताया कि उसकी सेनाओं ने ईरान के खिलाफ लगातार नौवीं रात सफलतापूर्वक हमले पूरे किए हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन अभियानों में ईरानी सैन्य कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली, तटीय निगरानी ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स तथा संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया। सेंटकॉम का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर हमला करने की ईरान की क्षमता को कम करना है।
इनपुट: IANS



