शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल: अगले दशक में 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) अगले एक दशक में नई ऊंचाइयों को छू सकती है। नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती दिलचस्पी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग के दम पर 2033 तक…

भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल: अगले दशक में 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
(फोटो: IANS)

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) अगले एक दशक में नई ऊंचाइयों को छू सकती है। नीतिगत सुधारों, निजी क्षेत्र की बढ़ती दिलचस्पी और अंतरिक्ष आधारित सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग के दम पर 2033 तक इसके 4.22 लाख करोड़ रुपए (44 अरब डॉलर) तक पहुंचने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से यह जानकारी EY और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक संयुक्त रिपोर्ट में सामने आई है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले सात से आठ वर्षों में सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स, निवेशकों और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर ठोस प्रयास करने होंगे। यह रिपोर्ट मानती है कि भारत अब सिर्फ सरकारी नेतृत्व वाले अंतरिक्ष कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि एक उद्योग-केंद्रित इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव की नींव भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023, भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की भूमिका ने रखी है।

विकास के लिए छह प्रमुख क्षेत्र

इस रिपोर्ट में देश के स्पेस सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए छह प्रमुख प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें घरेलू विनिर्माण और लॉन्च क्षमता को मजबूत करने, नियामकीय और वित्तीय माहौल सुधारने, और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरिक्ष आधारित एप्लीकेशन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। साथ ही, व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने, रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और भारत को एक वैश्विक अंतरिक्ष साझेदार व निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।

स्पेस इकोनॉमी के तीन हिस्से

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। 'अपस्ट्रीम' गतिविधियों में सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च व्हीकल और प्रोपल्शन सिस्टम शामिल हैं। 'मिडस्ट्रीम' सेगमेंट में सैटेलाइट का संचालन और जमीनी ढांचा आता है। वहीं, 'डाउनस्ट्रीम' एप्लीकेशन में पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation), सैटेलाइट संचार, नेविगेशन सेवाएं और जियोस्पेशियल एनालिटिक्स जैसी सेवाएं शामिल हैं, जिनका सीधा असर आम जीवन पर पड़ता है।

विशेषज्ञों की राय

CII की राष्ट्रीय समिति (अंतरिक्ष) के चेयरमैन मल्लावरपु अप्पाराव ने कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर अब वैज्ञानिक खोज से आगे बढ़कर सैटेलाइट आधारित सेवाओं से चलने वाली एक नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था बन गया है। वहीं, EY इंडिया के एयरोस्पेस, डिफेंस एंड स्पेस पार्टनर सीडीआर गौतम नंदा ने कहा कि विकास के अगले चरण के लिए औद्योगिक क्षमता बढ़ाना, टेक्नोलॉजी का व्यवसायीकरण करना और सप्लाई चेन को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन कृषि, लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन और शासन-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ये भारत की रक्षा क्षमताओं को भी मजबूती दे रहे हैं।

इनपुट: IANS

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