सोमवार, 31 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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FY27 में भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ज़्यादा की रफ़्तार से बढ़ने की उम्मीद, क्या हैं मज़बूती के संकेत?

वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जो देश की मजबूत आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। EY की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज़…

FY27 में भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ज़्यादा की रफ़्तार से बढ़ने की उम्मीद, क्या हैं मज़बूती के संकेत?
(फोटो: IANS)

वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जो देश की मजबूत आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। EY की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज़ रफ़्तार को घरेलू खपत में मज़बूती और सरकारी पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी से बड़ा सहारा मिलेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 12.5 से 13 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में वैश्विक चुनौतियों का भी ज़िक्र किया गया है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊँची क़ीमतों और वैश्विक व्यापार के कमज़ोर माहौल के बावजूद, भारत का विकास का दृष्टिकोण काफ़ी मज़बूत बना हुआ है। उम्मीद है कि देश की आंतरिक आर्थिक गतिविधियाँ और सरकार द्वारा लगातार किया जा रहा खर्च पूरी अवधि में विकास को गति देगा।

औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ी

औद्योगिक मोर्चे पर भी भारत में मज़बूती के साफ़ संकेत मिले हैं। जून 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की वृद्धि दर बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 23 महीनों का उच्चतम स्तर है। इसी के चलते वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में औसत औद्योगिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो पिछली आठ तिमाहियों में सबसे ज़्यादा है। इस सुधार में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बड़ा योगदान रहा, जिसका उत्पादन जून में 7.8 प्रतिशत बढ़ा। इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल उपकरण, मोटर वाहन, टेक्सटाइल और खाद्य उत्पादों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।

कुछ संकेतकों में नरमी, पर चिंता की बात नहीं

हालांकि, कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर यानी जल्दी-जल्दी आने वाले आँकड़े विस्तार की रफ़्तार में थोड़ी नरमी का इशारा करते हैं। उदाहरण के लिए, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में घटकर 53.5 पर आ गया, जो जून में 54.2 था। इसी तरह, सर्विसेज पीएमआई भी 57.4 से गिरकर 53.3 पर आ गया। EY ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस सुस्ती के बावजूद, दोनों सूचकांक 50 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर बने हुए हैं, जो आर्थिक गतिविधियों में विस्तार जारी रहने का संकेत है।

बैंक क्रेडिट और सरकारी खर्च से मिला सहारा

अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने में ऋण की आसान उपलब्धता भी एक अहम कड़ी साबित हो रही है। जून में बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कुल क़र्ज़ (ग्रॉस बैंक क्रेडिट) में 18.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 25 महीनों में सबसे तेज़ वृद्धि है। यह दिखाता है कि कारोबार और अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों के लिए पैसों की उपलब्धता बनी हुई है। इसके अलावा, सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर ज़ोर भी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में 23.3% की गिरावट के बाद, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में सरकारी पूंजीगत खर्च में 23.7% का तेज़ उछाल देखा गया। EY का मानना है कि इस खर्च से घरेलू मांग को बनाए रखने और रियल जीडीपी ग्रोथ की संभावनाओं को मज़बूत करने में मदद मिलेगी।

इनपुट: IANS

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