अमेरिका से टैरिफ विवाद सुलझाया, चीन के लिए निवेश के नियम आसान: भारत का सधा हुआ संतुलन
भारत ने साल 2026 में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन, के साथ अपने आर्थिक संबंधों में एक नाजुक संतुलन साधने में कामयाबी हासिल की है। एक तरफ जहाँ वॉशिंगटन के साथ लंबे समय से चले आ…
भारत ने साल 2026 में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं, अमेरिका और चीन, के साथ अपने आर्थिक संबंधों में एक नाजुक संतुलन साधने में कामयाबी हासिल की है। एक तरफ जहाँ वॉशिंगटन के साथ लंबे समय से चले आ रहे टैरिफ विवाद को बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है, वहीं दूसरी ओर चीन से आने वाले निवेश के लिए 2020 के सीमा संघर्ष के बाद लगाए गए कड़े नियमों में भी नियंत्रित ढील दी गई है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की यह रणनीति अपनी पूंजी और मांग की जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम करने की कोशिश है, खासकर ऐसे समय में जब उसकी आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में कुछ कमी देखी जा रही है।
अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव में कमी
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में सुधार का बड़ा संकेत 2 फरवरी को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेता भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुए। इसके साथ ही, रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी पूरी तरह हटा दिया गया।
हालांकि, अमेरिका ने धारा 301 के तहत 10 प्रतिशत की ड्यूटी अलग से लगाई है, लेकिन इससे भारत का लगभग 45 प्रतिशत निर्यात प्रभावित नहीं होता। जियोपॉलिटिकल मॉनिटर में आलोक कुमार कनौजिया के एक लेख के मुताबिक, कुल मिलाकर अब टैरिफ की व्यवस्था एक साल पहले की तुलना में अधिक स्थिर और पूर्वानुमान योग्य है।
चीन के लिए निवेश का सीमित रास्ता खुला
चीन के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी नरमी दिखाई गई है। 10 मार्च को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रेस नोट 3 में संशोधन को मंजूरी दी। यह 2020 का वही नियम था, जिसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले हर निवेश के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य थी।
हालांकि, इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि चीन से प्रत्यक्ष निवेश का रास्ता पूरी तरह खुल गया है। नए नियमों के तहत, उन कंपनियों के लिए ऑटोमैटिक रूट की सुविधा दी गई है, जिनमें चीनी लाभकारी स्वामित्व 10 प्रतिशत से कम है और नियंत्रणकारी नहीं है। इसके अलावा, कुछ चुनिंदा क्षेत्रों जैसे पूंजीगत वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सौर ऊर्जा से जुड़े इनपुट के लिए 60 दिनों की मंजूरी की समयसीमा तय की गई है। सरकार के मुताबिक, अगस्त के अंत तक इन आसान नियमों के तहत 29 परियोजनाओं में करीब 4,896 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है।
बड़ी तस्वीर और आर्थिक अनुमान
ये दोनों कदम अलग-अलग लग सकते हैं, लेकिन साथ में ये भारत की व्यापक आर्थिक कूटनीति की तस्वीर पेश करते हैं। इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जो पिछले साल 7.4 प्रतिशत था। वहीं, S&P ने वित्त वर्ष 2027 में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है। दोनों ही अनुमान इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत बाहरी खाते को स्थिर रखने के लिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करना जारी रखे।
इनपुट: IANS



