निर्यात 15.5% बढ़ा, लेकिन महंगा कच्चा तेल और सोना बने चुनौती, व्यापार घाटा 30 अरब डॉलर के पार
भारत के विदेशी व्यापार के लिए जून का महीना मिला-जुला रहा। एक ओर जहाँ वस्तु निर्यात में 15.5% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर आयात में भारी उछाल के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर के
भारत के विदेशी व्यापार के लिए जून का महीना मिला-जुला रहा। एक ओर जहाँ वस्तु निर्यात में 15.5% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर आयात में भारी उछाल के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर के चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल और कीमती धातुओं की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेज़ी इसका मुख्य कारण रही।
आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में भारत का वस्तु निर्यात 40.41 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 34.98 अरब डॉलर से काफी ज़्यादा है। हालाँकि, यह उत्साहजनक आंकड़ा आयात के बढ़ते दबाव के सामने फीका पड़ गया। जून में आयात 31% बढ़कर 70.84 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि पिछले साल यह 54.08 अरब डॉलर था। इसी वजह से व्यापार घाटा (निर्यात और आयात का अंतर) पिछले साल के 19.10 अरब डॉलर से करीब 59% बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया।
तिमाही प्रदर्शन और नए बाज़ार
वैश्विक बाज़ारों की अनिश्चितताओं के बावजूद, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल वस्तु निर्यात लगभग 15.9% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा। सरकार के अनुसार, खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात अब युद्ध-पूर्व स्तर पर लौट आया है। वैकल्पिक शिपिंग मार्गों के इस्तेमाल से यह मार्च के 2.62 अरब डॉलर से बढ़कर मई में 5.3 अरब डॉलर हो गया। इसी तरह, अप्रैल-मई के दौरान अमेरिका को किया गया निर्यात भी 17.29 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच गया।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत अपने निर्यात के लिए लगातार नए बाज़ार तलाश रहा है। उन्होंने कहा, "अब भारत के कुल वस्तु निर्यात में आधे से अधिक हिस्सा एनएएफटीए और यूरोप के बाहर के क्षेत्रों का है, जो यह दर्शाता है कि भारत लगातार अपने निर्यात बाजारों में विविधता ला रहा है।"
आयात बढ़ने के प्रमुख कारण
सरकार ने स्पष्ट किया कि आयात में उछाल की सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम और रत्न एवं आभूषण (जेम्स एंड ज्वेलरी) जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कीमतों का बढ़ना है। इसके अलावा, देश में बढ़ती आय और मध्यम वर्ग की मजबूत मांग के कारण इलेक्ट्रॉनिक सामानों का आयात भी लगातार बढ़ रहा है। सरकार के मुताबिक, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा रत्न एवं आभूषण क्षेत्रों में व्यापार घाटा विशेष रूप से बढ़ा है।
इनपुट: IANS



