InVITs: अगले तीन साल में सड़क इन्फ्रा कंपनियां 40,000 करोड़ रुपये जुटाने को तैयार, जानें क्या है वजह
भारत में सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियाँ अगले तीन वर्षों में अपनी तैयार संपत्तियों से पैसा बनाने के लिए एक बड़े प्लान पर काम कर रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27
भारत में सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियाँ अगले तीन वर्षों में अपनी तैयार संपत्तियों से पैसा बनाने के लिए एक बड़े प्लान पर काम कर रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 तक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InVITs) के ज़रिए करीब 40,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने की उम्मीद है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूंजी बढ़ाना, कंपनियों पर कर्ज़ का बोझ कम करना और भविष्य की परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन सुरक्षित करना है।
यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब सरकार भी सड़क क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है। सोमवार को जारी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही करीब 10,000 किलोमीटर के नए हाईवे, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर प्रोजेक्ट आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्षेत्र की वित्तीय सेहत और भविष्य का अनुमान
रिपोर्ट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बनी रहेगी। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं—टोल कलेक्शन में मज़बूती, परियोजनाओं की एक स्वस्थ पाइपलाइन का होना, और InVITs जैसे नए फाइनेंसिंग मॉडलों को तेज़ी से अपनाना।
अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र के राजस्व में वित्त वर्ष 2027 में 8.6% की वृद्धि हो सकती है, जो वित्त वर्ष 2026 के 7.3% के अनुमान से बेहतर है। इसके अलावा, ऑपरेटिंग मार्जिन भी 24.3% से बढ़कर 25.1% तक पहुँचने की संभावना है, जिसका श्रेय प्रोजेक्ट्स के तेज़ क्रियान्वयन और कच्चे माल की लागत में आई कमी को दिया गया है। स्टील और बिटुमेन जैसे कच्चे माल की कीमतों में गिरावट से कंपनियों के मुनाफे को सीधा सहारा मिलेगा।
चुनौतियाँ और जोखिम भी मौजूद
हालांकि, रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया गया है। बेहतर कमाई के बावजूद, कंपनियों के लिए कर्ज़ चुकाने की क्षमता (डेट सर्विसिंग) एक बड़ी चिंता बनी रहेगी। इसकी मुख्य वजह भुगतान में होने वाली देरी और परियोजनाओं को लागू करने में आने वाली बाधाएँ हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 और 2027 के दौरान डेट सर्विस कवरेज रेशियो लगभग 0.5 गुना रहने का अनुमान है।
इसके साथ ही, राज्य सरकारों की परियोजनाओं में भुगतान से जुड़े जोखिम, लंबे समय तक फँसा रहने वाला पैसा (रिसीवेबल साइकिल), और ठेके हासिल करने के लिए लगाई जाने वाली आक्रामक बोलियाँ (एग्रेसिव बिडिंग) भी इस सेक्टर के सामने बड़ी चुनौतियाँ बनी रहेंगी।
इनपुट: IANS



