भारत में डीपटेक: 2015 से 11 अरब डॉलर से ज़्यादा निवेश, AI और EV बने निवेशकों की पसंद
भारतीय डीपटेक सेक्टर यानी अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से अब तक इस क्षेत्र में निजी…
भारतीय डीपटेक सेक्टर यानी अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टअप्स में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से अब तक इस क्षेत्र में निजी इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) के ज़रिए लगभग 11.4 अरब डॉलर का निवेश आ चुका है। दिलचस्प बात यह है कि स्टार्टअप फंडिंग में आई आम सुस्ती के बावजूद 2024 डीपटेक निवेश के लिए अब तक का सबसे मज़बूत साल बनकर उभरा है।
इंडियन वेंचर एंड अल्टरनेट कैपिटल एसोसिएशन (IVCA) की सोमवार को जारी रिपोर्ट बताती है कि 2016 के बाद से डीपटेक में निवेश की रफ़्तार में काफ़ी तेज़ी आई है। यह वैश्विक रुझान के अनुरूप है, जहाँ निवेशक अत्याधुनिक तकनीकों पर दांव लगा रहे हैं। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जेनरेटिव AI, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र निवेशकों को सबसे ज़्यादा आकर्षित कर रहे हैं।
निवेश का केंद्र और उभरते शहर
भौगोलिक रूप से देखें तो बेंगलुरु भारत का डीपटेक हब बना हुआ है। पिछले एक दशक में हुए कुल निवेश और सौदों का लगभग आधा हिस्सा अकेले इसी शहर के नाम रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र है कि अब अहमदाबाद, कोच्चि और कोलकाता जैसे शहर भी डीपटेक गतिविधियों और निवेश के नए केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहे हैं।
सरकारी नीतियों और नए क्षेत्रों का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, सेमीकंडक्टर और स्पेसटेक (अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) जैसे क्षेत्रों ने सबसे तेज़ विकास दर्ज किया है। इन दोनों सेक्टर्स को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की नीतियों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाई है। सर्वेक्षण में शामिल ज़्यादातर फंड्स ने AI, जेनरेटिव AI और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) में सबसे ज़्यादा रुचि दिखाई, जिसके बाद स्पेसटेक और डिफेंस टेक्नोलॉजी का स्थान रहा।
चुनौतियाँ और भविष्य की राह
IVCA के अध्यक्ष रजत टंडन ने कहा, "भारत का डीपटेक इकोसिस्टम अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज़ी से निवेश योग्य अवसरों वाले क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है।" उन्होंने संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भागीदारी को इस बदलाव का स्पष्ट संकेत बताया।
हालांकि, उन्होंने कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। टंडन के अनुसार, वैश्विक स्तर की डीपटेक कंपनियाँ बनाने के लिए भारत को सीरीज़-बी और सीरीज़-सी फंडिंग के अंतर को पाटना होगा। इसके अलावा, घरेलू लिमिटेड पार्टनर्स (LP) की भागीदारी बढ़ाने, कंपनियों के लिए बेहतर एग्जिट अवसर बनाने और नीतिगत ढांचे को और मज़बूत करने की ज़रूरत है। रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि शुरुआती चरण के बाद विकास के दौर में स्टार्टअप्स के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाना एक बड़ी मुश्किल है, क्योंकि डीपटेक कंपनियों को सफलता पाने में ज़्यादा समय लगता है।
इनपुट: IANS



