गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

रेलवे का बड़ा कदम: दुर्ग-तरोकी रूट पर ₹226 करोड़ से सिग्नल सिस्टम होगा आधुनिक, 13 स्टेशन कवर होंगे

भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक अहम फ़ैसले को मंज़ूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर डिव

रेलवे का बड़ा कदम: दुर्ग-तरोकी रूट पर ₹226 करोड़ से सिग्नल सिस्टम होगा आधुनिक, 13 स्टेशन कवर होंगे
(फोटो: IANS)

भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क को सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक अहम फ़ैसले को मंज़ूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर डिवीजन में स्थित दुर्ग-तरोकी सेक्शन के सिग्नलिंग ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए ₹226 करोड़ की एक परियोजना शुरू की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ट्रेन संचालन को पहले से ज़्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाना है।

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इस परियोजना के तहत, इस महत्वपूर्ण रेल खंड के 13 स्टेशनों पर दशकों पुरानी पैनल इंटरलॉकिंग (PI) प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिस्टम लगाया जाएगा। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव ट्रेन संचालन में सुरक्षा और विश्वसनीयता को उल्लेखनीय रूप से बेहतर करेगा।

किन स्टेशनों पर होगा बदलाव?

इस आधुनिकीकरण अभियान में कुल 13 स्टेशनों को शामिल किया गया है। इनमें मरौदा, रिसामा, गुंडरदेही, लाटाबोड़, बालोद, कुसुमकसा, दल्ली राजहरा, गुदुम, भानुप्रतापपुर, केवटी, अंतागढ़, तरोकी और रायपुर स्टोर डिपो शामिल हैं। इन सभी जगहों पर मौजूदा सिग्नलिंग व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और इसके फ़ायदे?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) एक आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली है जो कंप्यूटर आधारित तकनीक का उपयोग करती है। यह ट्रेनों के लिए रूट तय करने और सिग्नल को संचालित करने की प्रक्रिया को स्वचालित बनाती है, जिसमें कई अतिरिक्त सुरक्षा फीचर भी होते हैं।

रेल मंत्रालय ने बताया कि पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग की तुलना में यह नई प्रणाली कई मायनों में बेहतर है:

  • अधिक सुरक्षा: इसमें सिग्नल संबंधी मानवीय या तकनीकी त्रुटियों की आशंका कम हो जाती है।
  • बढ़ी हुई विश्वसनीयता: सिस्टम ज़्यादा भरोसेमंद होता है, जिससे तकनीकी ख़राबी की घटनाएं घटती हैं।
  • बेहतर समयपालन: ट्रेनों की आवाजाही सुगम होने से उनके समय पर चलने (पंक्चुअलिटी) में सुधार आएगा।
  • अधिक लचीलापन: किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर सेवाओं को जल्दी बहाल करना आसान होता है।

रेलवे के अनुसार, यह परियोजना देश भर में रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली को आधुनिक बनाने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है। इस अपग्रेड से न केवल यात्री और माल यातायात को अधिक कुशलता से संभालने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी यह नेटवर्क तैयार होगा।

इनपुट: IANS

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