भारतीय मूल के अनिल मेनन अपने पहले मिशन पर अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे, 8 महीने तक करेंगे वैज्ञानिक प्रयोग
भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले स्पेस मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वे रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष य
भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले स्पेस मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वे रूस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना हुए थे। मेनन और उनके दो रूसी साथी अंतरिक्ष में आठ महीने बिताएंगे, जहां वे कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लेंगे।
मेनन के साथ इस मिशन पर रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी गए हैं। यह मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है, जबकि उनके दोनों साथियों का यह दूसरा मिशन है। सोयुज यान ने प्रक्षेपण के बाद लगभग तीन घंटे और दो ऑर्बिट की यात्रा पूरी की और अमेरिकी समय (EDT) के अनुसार दोपहर 1:52 बजे आईएसएस के प्रिचल मॉड्यूल से सफलतापूर्वक जुड़ गया।
8 महीने का वैज्ञानिक मिशन
इस मिशन के दौरान मेनन का मुख्य ध्यान वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीक के प्रदर्शन पर होगा, जिसका उद्देश्य मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को आगे बढ़ाना है। वे माइक्रोग्रैविटी में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल के उत्पादन को बेहतर बनाने पर शोध करेंगे। इस शोध से हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और बेहतर चिकित्सा उपकरणों के लिए जरूरी पुर्जों का बड़े पैमाने पर निर्माण संभव हो सकेगा।
नासा के अनुसार, मेनन ऑगमेंटेड रियलिटी और AI का उपयोग करके अल्ट्रासाउंड करने जैसी तकनीकों पर भी काम करेंगे, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में पृथ्वी से मेडिकल सपोर्ट की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा, वह खुद एक परीक्षण विषय के रूप में उन अध्ययनों में भाग लेंगे, जो अंतरिक्ष में रक्त प्रवाह में होने वाले बदलावों को समझने में मदद करेंगे।
ISS पर अब 10 अंतरिक्ष यात्री
अपने लॉन्च से पहले अनिल मेनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स की सेवा करने और नासा तथा हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के समर्थन में आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरने पर गर्व है!" मेनन, डुब्रोव और किकिना के पहुंचने के साथ ही, स्टेशन पर मौजूद क्रू सदस्यों की संख्या अस्थायी रूप से बढ़कर 10 हो गई है। लगभग दो सप्ताह बाद तीन पुराने सदस्य पृथ्वी पर लौट जाएंगे, जिसके बाद 'एक्सपीडिशन 75' शुरू होगा।
इनपुट: IANS



