बुधवार, 15 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर चीन के बढ़ते नियंत्रण से चिंता, विशेषज्ञ बोले- टैरिफ नीति से सहयोगियों को खोने का खतरा

अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने चीन की बढ़ती आर्थिक पकड़, खासकर महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत विनिर्माण पर, गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि यह अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। समा

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर चीन के बढ़ते नियंत्रण से चिंता, विशेषज्ञ बोले- टैरिफ नीति से सहयोगियों को खोने का खतरा
(फोटो: IANS)

अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने चीन की बढ़ती आर्थिक पकड़, खासकर महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत विनिर्माण पर, गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि यह अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि बीजिंग का मुकाबला करने के लिए बनाए जा रहे गठबंधनों को वाशिंगटन की भारी टैरिफ नीतियां कमजोर कर सकती हैं।

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यह चर्चा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की उपसमिति की एक सुनवाई के दौरान हुई, जिसमें आर्थिक सुरक्षा और विदेशों में अमेरिकी निवेश जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। उपसमिति के अध्यक्ष कोरी मिल्स ने स्पष्ट किया, "जो देश एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, अहम खनिजों, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नियंत्रण रखेगा, वही आने वाले दशकों में ग्लोबल वैश्विक अर्थव्यवस्था और शक्ति संतुलन को तय करेगा।"

खनिजों पर चीन का दबदबा और अमेरिकी निर्भरता

यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी माइकल होलोमन ने सुनवाई में कहा कि वाशिंगटन ने बीजिंग को महत्वपूर्ण खनिज सप्लाई चेन पर कब्जा करने की खुली छूट दे दी है। उन्होंने कहा, "मैंने खनिजों की इस 'कोल्ड वॉर' को हमारी भागीदारी के बिना सुलगते हुए देखा है। मैंने देखा है कि चीन ने हमें हर जगह हराया है। ऐसा इसलिए नहीं कि हम कुछ नहीं कर सकते थे, बल्कि इसलिए क्योंकि हमने उस चल रही लड़ाई में हिस्सा ही नहीं लिया।"

होलोमन ने इस निर्भरता के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमेरिका चीन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आने वाली सामग्री के बिना फाइटर जेट, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक-वाहन बैटरी या स्मार्टफोन नहीं बना सकता। उन्होंने इसे "पसंद का मामला नहीं, बल्कि निर्भरता का मामला" बताया, जो हर साल एक बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनती जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका 13 अहम खनिजों के लिए पूरी तरह से और 20 अन्य के लिए 50% से अधिक आयात पर निर्भर है।

टैरिफ नीति पर उठे सवाल

कैटो इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता क्लार्क पैकार्ड ने चीन के प्रभुत्व को एक "वास्तविक कमजोरी" करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका की व्यापक टैरिफ नीतियां बीजिंग के खिलाफ गठबंधन बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इन टैरिफ ने भरोसेमंद सहयोगियों के साथ संबंध तनावपूर्ण कर दिए हैं और अमेरिकी निर्माताओं के लिए लागत बढ़ा दी है। पैकार्ड ने इसे "बीजिंग के लिए एक तोहफा" बताया।

उन्होंने कहा, "हमें दोस्तों और सहयोगियों के लिए दरवाजे खोलने चाहिए, न कि टैरिफ की दीवारों के पीछे छिपना चाहिए।" पैकार्ड ने 2025 में चीन द्वारा सात रेयर-अर्थ एलिमेंट्स के निर्यात पर रोक का उदाहरण भी दिया, जिससे अमेरिकी सेमीकंडक्टर और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई थी।

बाजार में चीनी कंपनियों की बढ़त

एक्रो ब्रिज के अध्यक्ष पॉल सुलिवन ने बताया कि चीनी कंपनियां अक्सर सब्सिडी वाले वित्त और कूटनीतिक समर्थन के साथ विदेशी बाजारों में प्रवेश करती हैं, जिससे निजी अमेरिकी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। चीन ने रक्षा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और स्वच्छ-ऊर्जा प्रौद्योगिकी के लिए आवश्यक खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में एक मजबूत वैश्विक स्थिति हासिल कर ली है, जिससे पश्चिमी सरकारें अब मित्र देशों में वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही हैं।

इनपुट: IANS

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