गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

मोबाइल बना साइबर ठगों का नया गढ़, भारत में SMS फ्रॉड में 146% का खतरनाक उछाल

साइबर अपराधी अब पारंपरिक वेब ब्राउज़र छोड़कर मोबाइल फोन को अपना मुख्य निशाना बना रहे हैं, जिसके चलते भारत में टेक्स्ट मैसेज (SMS) और मोबाइल आधारित धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल आया है। समाचार…

मोबाइल बना साइबर ठगों का नया गढ़, भारत में SMS फ्रॉड में 146% का खतरनाक उछाल
(फोटो: IANS)

साइबर अपराधी अब पारंपरिक वेब ब्राउज़र छोड़कर मोबाइल फोन को अपना मुख्य निशाना बना रहे हैं, जिसके चलते भारत में टेक्स्ट मैसेज (SMS) और मोबाइल आधारित धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल आया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की दूसरी छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में SMS स्कैम में 146 प्रतिशत की खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है।

विज्ञापन

इसी दौरान मोबाइल फ्रॉड के कुल मामलों में भी 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। यह वृद्धि आईओएस (iOS) डिवाइस पर 86 प्रतिशत और एंड्रॉयड (Android) डिवाइस पर 35 प्रतिशत रही। इसके विपरीत, वेब ब्राउज़र के ज़रिए होने वाली धोखाधड़ी में 10 प्रतिशत की कमी आई है, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि धोखेबाजों का ध्यान अब पूरी तरह से मोबाइल डिवाइस पर केंद्रित हो गया है।

तेज़, महंगा और ज़्यादा संगठित हुआ फ्रॉड

बायोकैच की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगी अब पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और महंगी हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जोखिम भरे भुगतानों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि धोखाधड़ी वाले हर सत्र (session) में औसत ट्रांसफर राशि 1.7 गुना बढ़ गई है। चिंता की बात यह है कि ठग अब बहुत कम समय में अपना काम कर रहे हैं—फ्रॉड सत्र की औसत अवधि 32 प्रतिशत तक घट गई है।

बायोकैच के ग्लोबल फ्रॉड इंटेलिजेंस निदेशक टॉम पीकॉक ने कहा, "एसएमएस स्कैम इसलिए बेहद प्रभावी होते हैं क्योंकि वे भरोसेमंद संचार माध्यम का फायदा उठाते हैं। इससे फर्जी संदेश भी असली लगते हैं और लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे कार्रवाई कर बैठते हैं।"

आर्थिक नुकसान और म्यूल अकाउंट्स का जाल

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बढ़ता डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम—जिसमें यूपीआई (UPI), मोबाइल बैंकिंग और ई-कॉमर्स शामिल हैं—साइबर ठगों के लिए एक आकर्षक लक्ष्य बन गया है। साल 2025 में, भारत में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों में शामिल कुल रकम 22,496 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।

इसी अवधि में जांच एजेंसियों ने देश के विभिन्न बैंकों की 700 से अधिक शाखाओं में 8.5 लाख से ज़्यादा म्यूल अकाउंट की पहचान की। कुल मिलाकर, 26.48 लाख म्यूल अकाउंट के मामले सामने आए। हालांकि, संदिग्ध रजिस्ट्री की मदद से 9,055 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन को रोकने में सफलता भी मिली।

पीकॉक ने चेतावनी दी, "धोखाधड़ी के तरीके लगातार अधिक आधुनिक होते जा रहे हैं। अपराधी अब सुनियोजित सोशल इंजीनियरिंग और स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को गुमराह करते हैं और चेतावनी संकेत सामने आने से पहले ही उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।"

वहीं, बायोकैच के ग्लोबल एडवाइजरी निदेशक सुभाशीष बोस ने एक सकारात्मक पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा, "बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।" उन्होंने कहा कि व्यवहार-आधारित इंटेलिजेंस बैंकों को धोखाधड़ी की जल्द पहचान कर तेजी से कार्रवाई करने में मदद कर सकती है।

इनपुट: IANS

N

News4Social टेक डेस्क

News4Social टेक डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से टेक्नोलॉजी से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →