सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

मत्स्य पालन में भारत का जलवा: दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, 3 करोड़ लोगों को देता है रोज़गार

भारत का मत्स्य पालन और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया है, जो करीब 3 करोड़ मछुआरों और किसानों की आजीविका का सहारा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

मत्स्य पालन में भारत का जलवा: दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, 3 करोड़ लोगों को देता है रोज़गार
(फोटो: IANS)

भारत का मत्स्य पालन और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया है, जो करीब 3 करोड़ मछुआरों और किसानों की आजीविका का सहारा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 8 प्रतिशत का योगदान देता है।

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सिर्फ मछली उत्पादन ही नहीं, बल्कि भारत जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) में भी विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है। वहीं, झींगा के उत्पादन और निर्यात के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। यह क्षेत्र सिर्फ मछुआरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी पूरी मूल्य शृंखला (वैल्यू चेन) में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

सरकारी योजनाओं से मिला बड़ा सहारा

सरकार ने इस क्षेत्र के सतत विकास और आधुनिकीकरण के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से अब तक इस सेक्टर में कुल 39,272 करोड़ रुपए का निवेश किया जा चुका है। यह निवेश ब्लू रिवोल्यूशन योजना, फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (एफआईडीएफ), और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) जैसी कई सरकारी पहलों के माध्यम से किया गया है।

युवाओं और नई तकनीक पर ज़ोर

मंत्रालय का मानना है कि इस क्षेत्र का भविष्य युवाओं और किसानों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है। आज युवा पीढ़ी आधुनिक जलीय कृषि तकनीक, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड-चेन प्रबंधन, ब्रांडिंग और निर्यात जैसी गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रही है। सरकार का मानना है कि युवाओं और उद्यमशील किसानों की यही भागीदारी भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ को नई रफ्तार देगी।

एक नई उप-योजना से मिलेगी गति

इस क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी साल 8 फरवरी 2024 को 'प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना' (पीएम-एमकेएसएसवाई) को मंजूरी दी थी। यह पीएमएमएसवाई के तहत एक केंद्रीय उप-योजना है, जिसे वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए लागू किया जा रहा है।

₹6,000 करोड़ के बजट वाली यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करना, उत्पादकता बढ़ाना, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। हाल ही में, स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद मत्स्य पालन विभाग ने इस योजना के लाभार्थियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया था।

इनपुट: IANS

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