बुधवार, 15 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर संकट: सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता पर भारत ने जताई गहरी चिंता

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। भारत ने चेतावनी दी है कि परिषद की लगातार निष्क्रियता और दुनिया भर में चल रहे गंभीर संघर्षों को

संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर संकट: सुरक्षा परिषद की निष्क्रियता पर भारत ने जताई गहरी चिंता
(फोटो: IANS)

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। भारत ने चेतावनी दी है कि परिषद की लगातार निष्क्रियता और दुनिया भर में चल रहे गंभीर संघर्षों को रोकने में उसकी विफलता के कारण संयुक्त राष्ट्र पर से लोगों का भरोसा कम हो रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बात संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने एक मंत्रिस्तरीय बैठक में कही।

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पी. हरिश ने कहा, "हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को लेकर लोगों की धारणा नकारात्मक हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि सुरक्षा परिषद दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी भीषण संघर्षों में सार्थक हस्तक्षेप करने में विफल रही है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिषद प्रभावित आबादी की मानवीय पीड़ा को समाप्त करने में प्रभावी साबित नहीं हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की उसकी क्षमता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

सुधारों पर ठोस प्रगति का अभाव

भारत ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि सुरक्षा परिषद में सुधारों पर चल रही अंतर-सरकारी वार्ताएं (IGN) केवल "पहले से तैयार बयानों के अंतहीन दौर" बनकर रह गई हैं और उनमें कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। हरिश 'पैक्ट फॉर द फ्यूचर' के लक्ष्यों पर आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के लगभग 80 साल बाद बनी संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना आज की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपर्याप्त है।

उन्होंने कहा कि इसी गतिरोध के कारण 'पैक्ट फॉर द फ्यूचर' के हिंसा, नस्लवाद और लैंगिक समानता से जुड़े कई एक्शन प्वाइंट्स केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा, "यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इसमें बदलाव होना चाहिए।"

वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधार की जरूरत

सुरक्षा परिषद के अलावा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को अधिक प्रभावी बनाने और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) की भूमिका को मजबूत करने की भी वकालत की। पी. हरिश ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में भी सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि उन्हें "अधिक प्रतिनिधिक, अधिक जवाबदेह और विकासोन्मुख बनना होगा।"

उन्होंने ग्लोबल साउथ के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के सिद्धांत के साथ काम कर रहा है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि किसी को भी पीछे न छोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति के लिए पर्याप्त और सस्ती वित्तीय व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

इनपुट: IANS

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