बुधवार, 15 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

बंगाल का आरजी कर मामला: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से केस वापस होंगे, हिंसा के दोषियों पर होगी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में 2024 के चर्चित आरजी कर रेप और हत्याकांड मामले में न्याय की मांग करने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य

बंगाल का आरजी कर मामला: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से केस वापस होंगे, हिंसा के दोषियों पर होगी कार्रवाई
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में 2024 के चर्चित आरजी कर रेप और हत्याकांड मामले में न्याय की मांग करने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य की नई सरकार ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान डॉक्टरों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों पर दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। ये मामले पिछली ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में दर्ज किए गए थे।

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यह कदम कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग की सिफारिशों के आधार पर उठाया जा रहा है। राज्य सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, आयोग उन मामलों की विशेष रूप से पहचान करेगा जो कथित तौर पर आंदोलन को दबाने या प्रदर्शनकारियों को परेशान करने के इरादे से दर्ज किए गए थे।

हिंसा और सबूत मिटाने वालों पर शिकंजा

एक तरफ जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत दी जा रही है, वहीं प्रशासन उन लोगों पर भी कार्रवाई की तैयारी में है जो हिंसा में शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि पुलिस 14 अगस्त, 2024 की आधी रात को उत्तरी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और हिंसा के दोषियों की पहचान करेगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।

आरोपों के अनुसार, इस हिंसा के पीछे दो मुख्य मकसद थे — पहला, घटनास्थल से सबूतों को नष्ट करना और दूसरा, महिला डॉक्टर के साथ हुए अपराध के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों से मीडिया का ध्यान भटकाना।

नई सरकार का स्पष्ट रुख

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को फिर से खोलने का आदेश दिया था। इसी क्रम में तीन आईपीएस अधिकारियों — कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त विनीत कुमार गोयल, पूर्व डीसीपी (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और पूर्व डीसीपी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी — को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।

एक सूत्र ने नई सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, "प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सबूतों से छेड़छाड़ कर बड़ी साजिश को कमजोर करने की कोशिशों में शामिल लोगों को सजा मिले, साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक मामलों और उत्पीड़न से मुक्त किया जाए।"

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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