धरती पर नज़र रखने वाले NISAR सैटेलाइट ने भेजा डेटा, अंटार्कटिका में दिखी हमिंगबर्ड की आकृति
भारत और अमेरिका के संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन मिशन 'निसार' ने अपने दोनों शक्तिशाली रडार उपकरणों से जुटाया गया डेटा अब वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए जारी करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
भारत और अमेरिका के संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन मिशन 'निसार' ने अपने दोनों शक्तिशाली रडार उपकरणों से जुटाया गया डेटा अब वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए जारी करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सैटेलाइट से मिले डेटा से पृथ्वी की सतह और बर्फीले क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को अभूतपूर्व सटीकता से समझने में मदद मिलेगी।
नासा-इसरो सिंथेटिक ऐपर्चर रडार (NISAR) मिशन के डेटा को 20 जुलाई से सार्वजनिक किया गया है। नासा ने पुष्टि की है कि अमेरिका और भारत की टीमें अब सैटेलाइट के एल-बैंड और एस-बैंड रडार से मिले प्रोसेस किए गए डेटा को लगातार उपलब्ध कराती रहेंगी। इसरो के अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर ने 'भूनिधि' पोर्टल के माध्यम से एस-बैंड डेटा जारी करना शुरू कर दिया है, जबकि अमेरिका की ओर से 17 जून से जुटाया गया एल-बैंड डेटा लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है।
अंटार्कटिका की अद्भुत तस्वीर
इस डेटा की क्षमताओं को दर्शाने के लिए नासा ने एक शुरुआती तस्वीर भी जारी की है। इसमें पूर्वी अंटार्कटिका का नुनातक जतेरजावशिज्जा नामक पहाड़ी इलाका दिखाई दे रहा है। इस तस्वीर की खास बात यह है कि पहाड़ के चारों ओर बहती हुई टूटी-फूटी बर्फ की आकृति एक उड़ते हुए हमिंगबर्ड जैसी दिखती है।
नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के सिग्नल विश्लेषण इंजीनियर सेओंगसू जियोंग ने बताया कि यह तस्वीर न सिर्फ खूबसूरत है, बल्कि इससे ग्लेशियर की गति को समझने में भी मदद मिलती है। तस्वीर में अलग-अलग रंग माइक्रोवेव सिग्नल के बर्फ से टकराकर लौटने के तरीके को दर्शाते हैं। चिकनी सतह मैजेंटा रंग में, जबकि दरारें और उबड़-खाबड़ हिस्से हरे रंग की तेज रेखाओं के रूप में दिखाई देते हैं। यह तस्वीर अगस्त 2025 में एल-बैंड रडार के डेटा से बनाई गई थी, जब मिशन की टीमें सैटेलाइट सिस्टम का परीक्षण कर रही थीं।
NISAR मिशन की खासियतें
निसार सैटेलाइट को 30 जुलाई, 2025 को भारत के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था। यह हर 12 दिन में दो बार पृथ्वी की लगभग पूरी जमीन और बर्फ से ढकी सतहों की निगरानी करता है। सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह बादलों और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकता है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य जमीन और बर्फ की हलचल पर नजर रखना, जंगलों की निगरानी करना और भूकंप, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद के हालात का सटीक आकलन करना है। यह मिशन हर दिन कई दर्जन टेराबाइट डेटा उत्पन्न करता है। निसार, नासा और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पहला सैटेलाइट मिशन है, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे अंतरिक्ष सहयोग का प्रतीक है।
इनपुट: IANS



