गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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यात्री विमानों के लिए रूस से हाथ मिलाएगा भारत? संयुक्त उत्पादन पर बातचीत अंतिम दौर में

भारत अपनी बढ़ती क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस के साथ मिलकर यात्री विमानों के संयुक्त निर्माण की संभावनाएं तलाश रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस…

यात्री विमानों के लिए रूस से हाथ मिलाएगा भारत? संयुक्त उत्पादन पर बातचीत अंतिम दौर में
(फोटो: IANS)

भारत अपनी बढ़ती क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस के साथ मिलकर यात्री विमानों के संयुक्त निर्माण की संभावनाएं तलाश रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में पहुँच गई है, जिससे पारंपरिक रक्षा सौदों से आगे बढ़कर औद्योगिक सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

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गुरुवार को भारत के नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव से मुलाक़ात की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा भारत की घरेलू उड़ान आवश्यकताओं के लिए नागरिक यात्री विमानों का मिलकर निर्माण करना था।

खरीदार से साझेदार बनने की ओर

इस बैठक के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की अपार संभावनाओं को देखते हुए भारत और रूस के पास अपने संबंधों को खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़ाकर संयुक्त विनिर्माण और गहरे औद्योगिक सहयोग तक ले जाने का एक मजबूत अवसर है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत-रूस संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और विमानन इस रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है।

समझौते की रूपरेखा

इस सहयोग की नींव पहले ही रखी जा चुकी है। भारत की सरकारी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) के बीच सुपरजेट (एसजे-100) सिविल विमान के लाइसेंस-आधारित उत्पादन के लिए एक प्रारंभिक समझौता हो चुका है। बताया जा रहा है कि इसके स्थानीयकरण को लेकर बातचीत अब अपने अंतिम दौर में है। प्रस्तावित सौदों में भारतीय विमानन कंपनियों, जिनमें पिनैकल एयर, एयर केरल और स्लीक एविएशन शामिल हैं, को 105 क्षेत्रीय टर्बोप्रॉप विमानों की संभावित डिलीवरी भी शामिल है।

'मेक इन इंडिया' पर वैश्विक भरोसा

यह पहल उस वक्त हो रही है जब रूस मिग और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों से आगे बढ़कर भारत के साथ अपने औद्योगिक सहयोग को विस्तार देना चाहता है। दिल्ली में 9 से 11 सितंबर तक आयोजित 'इनोप्रोम इंडिया' कार्यक्रम में रूस ने अपने एसजे-100, एमसी-21 और आईआई-114-300 जैसे विमानों का प्रदर्शन भी किया था। इसी दौरान, ब्राजील की कंपनी एम्ब्राएर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी मंत्री नायडू से मिलकर अपनी ‘मेक इन इंडिया’ योजनाओं पर चर्चा की। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "भारत के बढ़ते एयरोस्पेस इकोसिस्टम में वैश्विक ओईएम का भरोसा और वैश्विक विमानन सप्लाई चेन में प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के रूप में भारतीय निर्माताओं पर बढ़ती निर्भरता उत्साहजनक है।"

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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