कश्मीर पर तुर्किये की टिप्पणी को भारत ने बताया अनावश्यक, कहा- बाहरी दखल का अधिकार नहीं
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इन टिप्पणियों को पूरी…
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इन टिप्पणियों को पूरी तरह से अनावश्यक और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया और दो टूक कहा कि यह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का मामला है, जिस पर किसी भी बाहरी पक्ष को बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह जवाब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया, "भारत, तुर्किये के राष्ट्रपति द्वारा यूएनजीए संबोधन के दौरान भारतीय केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बारे में की गई अनावश्यक टिप्पणियों को खारिज करता है।"
भारत का सुस्थापित और स्पष्ट रुख
यह पहली बार नहीं है जब तुर्किये ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया है। अतीत में भी जब एर्दोआन ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की थी, तब भी नई दिल्ली की ओर से ऐसी ही कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई थी। पिछले साल भी भारत ने कश्मीर पर अपना 'सुस्थापित रुख' दोहराया था, जिसके तहत किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका या मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।
रणधीर जायसवाल ने कहा, "कश्मीर पर हमारा बयान स्पष्ट है। पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर पर हमारी स्थिति से हर कोई वाकिफ है।" उन्होंने यह बात सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में एर्दोआन द्वारा दोबारा कश्मीर पर टिप्पणी करने की संभावना से जुड़े एक सवाल के जवाब में कही।
OIC संपर्क समूह को भी दिया था जवाब
उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते भी भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह द्वारा जारी एक संयुक्त विज्ञप्ति में की गई टिप्पणियों को खारिज किया था। भारत ने उन्हें "अनावश्यक और तथ्यात्मक रूप से गलत" बताया था और कहा था कि इस समूह को भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने उस समय भी जोर देकर कहा था कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का 'अभिन्न और अविभाज्य' हिस्सा है। मंत्रालय के अनुसार, 'राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रचार को कितनी भी बार दोहराने से यह वास्तविकता नहीं बदल सकती।'
इनपुट: IANS



