रणनीतिक साझेदारी से भारत और न्यूज़ीलैंड के संबंध हुए मज़बूत, व्यापार और रक्षा सहयोग को मिली नई दिशा
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और रणनीतिक साझेदारी के बाद दोनों देशों के आर्थिक और रक्षा संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2026 की…
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और रणनीतिक साझेदारी के बाद दोनों देशों के आर्थिक और रक्षा संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुलाई 2026 की न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे हैं। समाचार एजेंसी IANS ने लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक लेख के हवाले से बताया है कि न्यूज़ीलैंड की संसद द्वारा FTA की पुष्टि के बाद दोनों देश अपने पहले द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की तैयारी भी कर रहे हैं।
यह समझौता दोनों देशों के लिए कई नए अवसर लेकर आया है। एक तरफ जहाँ भारतीय उत्पादों को न्यूज़ीलैंड के बाज़ार में शुल्क-मुक्त पहुँच मिलेगी, वहीं FTA के पूरी तरह लागू होने पर न्यूज़ीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो खत्म हो जाएगा या काफी कम हो जाएगा। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 4 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
अमेरिकी व्यापार नीतियों से पैदा हुई वैश्विक अनिश्चितताओं के माहौल में भारत जैसा बड़ा और तेज़ी से बढ़ता बाज़ार न्यूज़ीलैंड के लिए विशेष रूप से आकर्षक है। लेख के अनुसार, न्यूज़ीलैंड का व्यापार परंपरागत रूप से चीन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे कुछ देशों पर केंद्रित रहा है। वर्ष 2025 में न्यूज़ीलैंड के कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी महज़ 1.8 प्रतिशत थी, जिसके FTA लागू होने के बाद काफी बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, भारत के लिए न्यूज़ीलैंड उन्नत अनुसंधान, शिक्षा, कृषि और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएँ प्रदान करता है।
बढ़ता सामरिक और समुद्री गठजोड़
व्यापार के अलावा, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी मज़बूत हो रहा है, जिसमें समुद्री सहयोग की भूमिका अहम है। समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझा करने पर बनी सहमति ने इस साझेदारी को एक नया आयाम दिया है। इससे न्यूज़ीलैंड के लिए भारत की 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' (IPOI) के समुद्री सुरक्षा स्तंभ से जुड़ने का रास्ता भी खुल गया है। यह सहयोग दोनों देशों को समुद्री जागरूकता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने का अवसर देगा। इस साझेदारी के ज़रिए भारत को ओशिनिया क्षेत्र में एक मज़बूत साथी मिलता है, जो उसके मुक्त, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक विजन को भौगोलिक विस्तार देता है।
इनपुट: IANS



