भारत की साइबर सुरक्षा होगी और मज़बूत, अत्याधुनिक AI मॉडल 'ग्लासविंग' के लिए अमेरिका से बातचीत जारी
भारत अपने महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से बचाने के लिए एक बड़ी पहल कर रहा है। सरकार अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच हासिल करने के लिए अमेर
भारत अपने महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को साइबर हमलों से बचाने के लिए एक बड़ी पहल कर रहा है। सरकार अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच हासिल करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है, ताकि देश की डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा को और पुख्ता किया जा सके।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि इस उन्नत AI मॉडल से भारत को अपनी डिजिटल प्रणालियों का बेहद गहराई से परीक्षण करने में मदद मिलेगी।
क्या है प्रोजेक्ट ग्लासविंग?
प्रोजेक्ट ग्लासविंग को अमेरिकी AI कंपनी एंथ्रोपिक ने अप्रैल 2026 में लॉन्च किया था। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है। इस प्रोजेक्ट में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), सिस्को और एनवीडिया जैसी कई वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं।
साइबर सुरक्षा के लिए क्यों ज़रूरी है AI?
एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे AI तकनीक शक्तिशाली हो रही है, यह साइबर अपराधियों के लिए नए हैकिंग टूल बनाने का ज़रिया भी बन रही है। इसी के साथ AI का उपयोग डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में छिपी कमजोरियों को खोजने के लिए भी किया जा सकता है। इसी दोधारी क्षमता को देखते हुए भारत अपनी साइबर सुरक्षा को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हम 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' तक पहुंच पाने के लिए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। इससे हमें एंथ्रोपिक के AI सिस्टम की मदद से अपनी डिजिटल प्रणालियों का गहन परीक्षण करने में मदद मिलेगी।"
भारत की मौजूदा तैयारी
हालांकि, सचिव ने यह भी साफ किया कि भारत केवल बातचीत के नतीजों का इंतज़ार नहीं कर रहा है। देश ने पहले से उपलब्ध AI मॉडलों का उपयोग करके अपने महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम की साइबर सुरक्षा जांच शुरू कर दी है। उनके मुताबिक, मौजूदा AI मॉडलों से लगभग 60 से 70 प्रतिशत साइबर सुरक्षा परीक्षण किया जा सकता है, लेकिन 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' जैसी उन्नत तकनीक से यह क्षमता और भी मज़बूत हो जाएगी।
इनपुट: IANS



