गुरूवार, 9 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

भारत बन रहा ग्लोबल कंपनियों का पावरहाउस, दुनिया के आधे GCC यहीं, AI टैलेंट में भी दूसरे नंबर पर

भारत अब सिर्फ़ बैक-ऑफ़िस सपोर्ट का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल कंपनियों के लिए इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का पावरहाउस बनता जा रहा है। देश में दुनिया के लगभग आधे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) मौजूद ह

भारत बन रहा ग्लोबल कंपनियों का पावरहाउस, दुनिया के आधे GCC यहीं, AI टैलेंट में भी दूसरे नंबर पर
(फोटो: IANS)

भारत अब सिर्फ़ बैक-ऑफ़िस सपोर्ट का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल कंपनियों के लिए इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का पावरहाउस बनता जा रहा है। देश में दुनिया के लगभग आधे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) मौजूद हैं और यह एंटरप्राइज़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टैलेंट के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बात मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कही।

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दिल्ली में CII GCC बिजनेस समिट में बोलते हुए नागेश्वरन ने बताया कि यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि हमारे लोगों की प्रतिभा के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि ये सेंटर शुरुआत में लागत कम करने के लिए भारत आए थे, लेकिन अपनी काबिलियत की वजह से यहीं टिक गए।

अर्थव्यवस्था में बढ़ता योगदान

वी. अनंत नागेश्वरन ने इस सेक्टर के आर्थिक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत का जीसीसी इकोसिस्टम पिछले दो दशकों में काफी बदला है, जहाँ आज 2,000 से ज़्यादा सेंटर्स में 20 लाख से अधिक पेशेवर काम कर रहे हैं। इस सेक्टर में रोजगार अब 23 लाख के करीब पहुँच रहा है और इसकी सालाना आय 60 अरब डॉलर से अधिक हो गई है, जो 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।

सीईए के मुताबिक, जीसीसी अब भारत की जीडीपी में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं और देश के बड़े शहरों में बनने वाली नई ऑफिस स्पेस में भी इनकी बड़ी हिस्सेदारी होती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "भारत के पैमाने के आस-पास भी कोई दूसरा देश नहीं है, क्योंकि दुनिया के लगभग आधे जीसीसी अब यहीं से काम कर रहे हैं।"

बैक-ऑफिस से इनोवेशन हब तक

नागेश्वरन ने समझाया कि भारतीय जीसीसी अब अपनी पारंपरिक भूमिका से बहुत आगे निकल चुके हैं। आज वे टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे हाई-वैल्यू वाले क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल बैंक मुंबई और बेंगलुरु से अपने रिस्क सिस्टम और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म चलाते हैं, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ चेन्नई और पुणे से गाड़ियाँ डिज़ाइन करती हैं, और सेमीकंडक्टर कंपनियाँ भारत में चिप डिज़ाइन का काम कर रही हैं। इसी तरह, फार्मा कंपनियाँ क्लिनिकल एनालिटिक्स और कंज्यूमर कंपनियाँ अपने भारतीय सेंटर्स से डिजिटल प्रोडक्ट बना रही हैं। उन्होंने कहा, "इन सेंटर्स में बनाई गई बौद्धिक संपदा असली है। पेटेंट यहीं फाइल किए जाते हैं, प्रोडक्ट यहीं से भेजे जाते हैं और ग्लोबल भूमिकाएं भी तेजी से यहीं बैठे लोग निभा रहे हैं।"

इनपुट: IANS

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