संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, PoK में मानवाधिकारों के दमन पर उठाए गंभीर सवाल
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के हनन और दमन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। भारत ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के दोहरे रवैये की ओर ध्यान…
भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के हनन और दमन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। भारत ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के दोहरे रवैये की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि जहाँ अन्य देशों की घटनाओं पर UN तीखी प्रतिक्रिया देता है, वहीं पाकिस्तान के मामलों पर वैसी गंभीरता नहीं दिखाई जाती।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'विवादों के शांतिपूर्ण समाधान' पर आयोजित एक खुली बहस के दौरान यह मुद्दा उठाया गया। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का ज़िक्र किए जाने पर, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने जवाब देते हुए कहा कि PoK में हो रहे घटनाक्रम पाकिस्तानी सत्ता के असली चरित्र को उजागर करते हैं।
PoK में दमन और मानवाधिकार
पी. हरिश ने कहा कि पूरी दुनिया पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हो रहे दमन को देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहाँ कश्मीरियों के बुनियादी अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक आज़ादी को लगातार कुचला जा रहा है। उन्होंने कहा, “ये कोई अलग-थलग मामले नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में करीब आठ दशकों से पाकिस्तानी सरकार की एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।”
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने संबोधन में PoK में हालिया हिंसक घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जून से अब तक अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे कम से कम 34 कश्मीरियों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने मार डाला है। इसी क्रम में, 14 जुलाई को तरारखाल में पाकिस्तानी सेना द्वारा छह कश्मीरियों की हत्या का भी ज़िक्र किया गया।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी
भारत ने पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक हालात पर भी टिप्पणी की। हरिश ने कहा कि दमन के उदाहरणों में पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई नेताओं को जेल में डालना और मुख्य विपक्षी पार्टी को अवैध घोषित करना शामिल है। गौरतलब है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस समय जेल में हैं और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को चुनावों में हिस्सा लेने से लगभग रोक दिया गया है।
इसके अलावा, पी. हरिश ने पाकिस्तानी संविधान में हुए 27वें संशोधन का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने एक 'संवैधानिक तख्तापलट' बताया। उन्होंने कहा कि इस संशोधन ने सेना प्रमुख की शक्तियों को मजबूत किया है और शीर्ष सैन्य नेताओं को आपराधिक मामलों से आजीवन छूट दी है, जिसने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है।
भारत का स्पष्ट रुख
अपनी बात समाप्त करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह मनगढ़ंत बातें करने के बजाय अपने देश के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दे। उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा, “जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा रहा है, है और रहेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के कुछ हिस्सों पर किया गया अवैध कब्ज़ा है।
इनपुट: IANS



