भारत अपनी तेल शोधन क्षमता बढ़ाएगा, वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में निभाएगा बड़ी भूमिका
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में चल रही उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी स्थिति को और मज़बूत करने का फैसला किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि देश अपनी…
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में चल रही उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी स्थिति को और मज़बूत करने का फैसला किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि देश अपनी तेल शोधन (Oil Refining) क्षमता को मौजूदा 272 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) से बढ़ाकर 300 MMTPA तक ले जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब युद्ध जैसी स्थितियों के कारण दुनिया भर में रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित हुई है।
वर्तमान में, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनर है और इसके 23 रिफाइनरी प्लांट सालाना लगभग 270 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल की प्रोसेसिंग करते हैं। केंद्रीय मंत्री पुरी ने इस क्षमता को भारत के लिए एक बड़ी ज़िम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा, "रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के शुद्ध निर्यातक के तौर पर, भारत इस क्षमता को सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि दुनिया भर में, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने दोस्तों के लिए एक भरोसेमंद, पारदर्शी और स्थिर ऊर्जा भागीदार बनने की ज़िम्मेदारी के तौर पर देखता है।"
भारत-मॉरीशस ऊर्जा समझौता
यह घोषणा भारत और मॉरीशस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद हुई। गुरुवार को दोनों देशों ने तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) के बीच भी एक अहम करार हुआ है।
इस समझौते के तहत इंडियन ऑयल अगले तीन वर्षों के लिए मॉरीशस को पेट्रोलियम उत्पादों का मुख्य आपूर्तिकर्ता बनेगा। मंत्री ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "ये जी2जी (सरकार से सरकार) और बी2बी (व्यापार से व्यापार) समझौते भारत-मॉरीशस ऊर्जा सहयोग में एक नया अध्याय शुरू करते हैं। इनसे मॉरीशस को स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति मिलेगी।" उन्होंने इस साझेदारी को दोनों देशों की गहरी दोस्ती का प्रतीक बताया जो पीढ़ियों तक मज़बूत रहेगी।
इनपुट: IANS



