मंगलवार, 7 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत बन रहा दुनिया का नया मैन्युफैक्चरिंग हब? एसोचैम की रिपोर्ट में बड़े बदलाव के संकेत

कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में सप्लाई चेन को लेकर जो बदलाव शुरू हुए हैं, उनका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलता दिख रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत तेजी से दुनिया के

भारत बन रहा दुनिया का नया मैन्युफैक्चरिंग हब? एसोचैम की रिपोर्ट में बड़े बदलाव के संकेत
(फोटो: IANS)

कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में सप्लाई चेन को लेकर जो बदलाव शुरू हुए हैं, उनका सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलता दिख रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक कंपनियां अब सिर्फ एक देश, खासकर चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं।

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इस बदलाव के पीछे 'चीन+1', फ्रेंडशोरिंग और नियरशोरिंग जैसी रणनीतियां हैं, जिनका मकसद सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। एसोचैम ने दुनिया की 10 सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया, जो मिलकर वैश्विक उत्पादन का करीब 65% हिस्सा बनाती हैं। इस विश्लेषण में भारत महामारी के बाद सबसे तेजी से उभरते देशों में से एक पाया गया।

विकास दर में आया उछाल

आंकड़े इस बदलाव की कहानी साफ तौर पर दिखाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से पहले (2016-19) भारत की औसत विनिर्माण वृद्धि दर 3.44% थी, जो 2022-25 के दौरान बढ़कर 4.15% हो गई। यह न केवल वैश्विक औसत से बेहतर है, बल्कि उससे लगभग दो प्रतिशत अंक अधिक भी है। दिलचस्प बात यह है कि महामारी से पहले सिर्फ चीन, मेक्सिको और रूस ही वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन अब इस सूची में भारत के साथ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसे देश भी शामिल हो गए हैं।

क्यों बढ़ रहा भारत का आकर्षण?

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, "वैश्विक विनिर्माण व्यवस्था में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है। अब कंपनियां सिर्फ उत्पादन की लागत नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता पर भी बराबर ध्यान दे रही हैं।" उन्होंने भारत के प्रदर्शन का श्रेय सरकार के आर्थिक सुधारों और निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिया। रिपोर्ट में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के पीछे कई वजहें बताई गई हैं:

  • मजबूत घरेलू मांग
  • बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स
  • 'चीन+1' रणनीति से बढ़ता विदेशी निवेश
  • सरकारी योजनाएं जैसे- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई), औद्योगिक कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि भारत लॉजिस्टिक्स, कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) और घरेलू सप्लायर नेटवर्क को और बेहतर बनाता है, तो वह वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

इनपुट: IANS

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