भारत-उज्बेकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की, व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जोर
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। सोमवार को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अपने समकक्ष बख्तियार सैदोव के बीच हुई बैठक में दोनों…
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। सोमवार को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अपने समकक्ष बख्तियार सैदोव के बीच हुई बैठक में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की गई। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए कहा, "अपने मित्र और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव से मिलकर खुशी हुई।" उन्होंने बताया कि इस दौरान ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई। साथ ही क्षेत्रीय चुनौतियों और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
सहयोग के नए आयाम
बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने दोनों देशों के रिश्तों में आई सकारात्मक गति की सराहना करते हुए कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा मानता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया।
विदेश मंत्री के अनुसार, भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते हाल के वर्षों में निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, लेकिन इसमें वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत खनन (माइनिंग) क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।
राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात
अपनी यात्रा के दौरान, उज्बेक विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात की। राष्ट्रपति सचिवालय के अनुसार, इस मुलाकात में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़े गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और साझेदारी को और मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इनपुट: IANS



