इबोला पर युगांडा को मिली कामयाबी, पर कांगो में हालात अब तक के सबसे गंभीर
अफ्रीका में इबोला के खिलाफ लड़ाई में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां युगांडा ने अपने हालिया प्रकोप पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है, वहीं पड़ोसी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो…
अफ्रीका में इबोला के खिलाफ लड़ाई में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां युगांडा ने अपने हालिया प्रकोप पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है, वहीं पड़ोसी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) अपने इतिहास के सबसे बड़े इबोला संकट से जूझ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने युगांडा के प्रयासों की सराहना की है।
अफ्रीका सीडीसी के महानिदेशक जीन कासेया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर युगांडा की तारीफ करते हुए कहा, "हमने युगांडा की सराहना की, जिसने मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व और समन्वित प्रयासों के जरिए इबोला प्रकोप को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।" उन्होंने यह बात कंपाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद याकुब जनाबी और युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक के बाद कही।
युगांडा की सफलता और आगे की चुनौती
युगांडा ने आधिकारिक तौर पर 28 जुलाई को इबोला प्रकोप के खत्म होने की घोषणा की थी। यह घोषणा डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित 42-दिनों की निगरानी अवधि पूरी होने से पहले ही कर दी गई थी। देश में आखिरी मरीज को 16 जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दी गई थी, जब उसकी रिपोर्ट वायरस के लिए नेगेटिव आई। हालांकि, कासेया ने आगाह किया कि इस उपलब्धि को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भविष्य में संक्रमण को रोकने के लिए निरंतर तैयारी, सतर्क निगरानी और बेहतर सीमा-पार समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
कांगो में रिकॉर्ड तोड़ प्रकोप
इसके विपरीत, डीआरसी में बुंडिबुग्यो वायरस से होने वाला इबोला प्रकोप अब देश के इतिहास का सबसे बड़ा बन गया है। डब्ल्यूएचओ की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार तक वहां 3,605 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 1,587 लोगों की मौत हो गई है। यह लगभग 44 प्रतिशत की मृत्यु दर को दर्शाता है। इससे पहले 2018-2020 के प्रकोप में 3,317 मामले दर्ज किए गए थे।
यह प्रकोप शुरुआत में सिर्फ एक स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित था, लेकिन पिछले दो महीनों में यह पांच प्रांतों के 49 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। इस संकट का असर स्वास्थ्यकर्मियों पर भी पड़ा है, जिनमें से 151 संक्रमित हुए हैं और 44 की जान जा चुकी है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह स्वास्थ्य संस्थानों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों में मौजूद कमियों को उजागर करता है।
इनपुट: IANS



