भारत-चीन सीमा व्यापार: लिपुलेख समेत तीन प्रमुख दर्रों को फिर से खोलने की प्रक्रिया तेज
भारत और चीन के बीच तीन महत्वपूर्ण हिमालयी दर्रों से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पुष्टि की कि दोनों देश लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला के…
भारत और चीन के बीच तीन महत्वपूर्ण हिमालयी दर्रों से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को पुष्टि की कि दोनों देश लिपुलेख, शिपकी ला और नाथू ला के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए अगस्त 2025 में बनी एक अहम सहमति पर आगे बढ़ रहे हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि यह कदम 19 अगस्त 2025 को जारी एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। उन्होंने कहा, "यह फैसला उसी समय लिया गया था और उस दौरान हुई चर्चाओं की जानकारी भी साझा की गई थी। अब उसी समझ के अनुरूप आगे की प्रक्रिया को अमल में लाया जा रहा है।"
कूटनीतिक बैठकों का दौर
यह प्रगति दोनों देशों के बीच लगातार हो रही उच्च-स्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं का परिणाम है। हाल ही में, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपनी चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-चीन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई, जिसमें व्यापार, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल थे।
इससे पहले पिछले सप्ताह ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान बैठकों के मौके पर मुलाकात हुई थी। उस चर्चा में भी सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों पर जोर दिया गया था।
सीमा पर शांति की अनिवार्यता
भारत ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। विक्रम मिस्री और हुआ चुनयिंग की हालिया बैठक में भी इस बात पर सहमति बनी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने भी वांग यी के साथ अपनी बैठक में स्पष्ट किया था कि अक्टूबर 2024 से दोनों देश इस दिशा में काम कर रहे हैं और संबंधित तंत्र को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है। सीमा व्यापार की बहाली को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और आर्थिक सहयोग को नई गति देने वाले एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
इनपुट: IANS



