शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

गुजरात की बड़ी तैयारी: नई डेटा सेंटर नीति से AI युग में भारत का नेतृत्व करने का लक्ष्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते युग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने के लिए गुजरात एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। राज्य ने अपनी नई 'विकसित गुजरात-डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-2029'…

गुजरात की बड़ी तैयारी: नई डेटा सेंटर नीति से AI युग में भारत का नेतृत्व करने का लक्ष्य
(फोटो: IANS)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते युग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने के लिए गुजरात एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। राज्य ने अपनी नई 'विकसित गुजरात-डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-2029' के तहत 7.5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का विशाल लक्ष्य रखा है, जो भारत की मौजूदा 1.5 गीगावाट क्षमता से लगभग पाँच गुना अधिक है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य गुजरात को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मज़बूत करना है।

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राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि इस नीति के तहत राज्य को 17 कंपनियों से 19 परियोजनाओं के लिए लगभग 17 गीगावाट क्षमता के प्रस्ताव (EoI) पहले ही मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, "अगर सभी आवेदन असल में प्रोजेक्ट्स में बदल जाते हैं, तो प्रस्तावित निवेश 17 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा हो सकता है। आवेदकों में देश और विदेश, दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं।"

डेटा स्टोरेज में आत्मनिर्भरता की ओर

अर्जुन मोढवाडिया ने डेटा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "आज के दौर में डाटा सेंटर तेल के कुओं की तरह हैं और गुजरात इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य देते हुए बताया कि भारत दुनिया का लगभग 20% डेटा उत्पन्न करता है, लेकिन इसका सिर्फ 2 से 2.5 प्रतिशत ही देश में स्टोर कर पाता है। अमेरिका की 53 गीगावाट क्षमता की तुलना में भारत की क्षमता केवल 1.5 गीगावाट है, जो वैश्विक क्षमता का महज़ 2% है। गुजरात की नई नीति इसी अंतर को पाटने का एक बड़ा प्रयास है।

निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन

नीति को आकर्षक बनाने के लिए सरकार कई तरह के प्रोत्साहन दे रही है। धोलेरा जैसे हाई-टेक इंडस्ट्रियल हब में प्रोजेक्ट लगाने वाले निवेशकों को 2.5 प्रतिशत की अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। मंत्री ने धोलेरा की विशाल क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 900 वर्ग किलोमीटर में फैला एक स्मार्ट शहर होगा, जो दिल्ली से तीन गुना और चीन के कई हाई-टेक शहरों से भी बड़ा होगा। इसके अलावा, डेटा सेंटरों की भारी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

मोढवाडिया ने कहा, "गुजरात और राजस्थान ग्रीन-एनर्जी बनाने में आगे हैं, और गुजरात अभी देश में ग्रीन-एनर्जी प्रोडक्शन में नंबर वन है। नई पॉलिसी के तहत, डाटा सेंटर्स को 51 प्रतिशत ग्रीन-एनर्जी बिजली मिल सकेगी।" पानी की आपूर्ति के लिए डिसेलिनेशन प्लांट लगाए जाएंगे और रिसाइकल किए गए पानी के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

बुनियादी ढाँचा और रोजगार के अवसर

इस इकोसिस्टम के विकास के लिए सबमरीन केबल कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण माना गया है। गिफ्ट सिटी में डेटा सेंटरों को सपोर्ट करने के लिए दीव, चोरवाड़, पोरबंदर, सूरत और धोलेरा जैसी जगहों पर केबल लैंडिंग स्टेशन स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है। अर्जुन मोढवाडिया ने विश्वास जताया कि यह उभरता हुआ सेक्टर उच्च-तकनीकी रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा और विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को वापस लाकर 'रिवर्स माइग्रेशन' को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा, "यह क्रांति नई पीढ़ी के लिए नए मौके पैदा करेगी।"

इनपुट: IANS

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