मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
टेक्नोलॉजी

कैंसर और संक्रमण से लड़ाई में भारत का बड़ा कदम, तीन स्वदेशी तकनीकें कंपनियों को सौंपी गईं

भारत में कैंसर की रोकथाम और संक्रामक रोगों पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश में ही विकसित की गईं तीन अत्याधुनिक बायोमेडिकल तकनीकों…

कैंसर और संक्रमण से लड़ाई में भारत का बड़ा कदम, तीन स्वदेशी तकनीकें कंपनियों को सौंपी गईं
(फोटो: IANS)

भारत में कैंसर की रोकथाम और संक्रामक रोगों पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश में ही विकसित की गईं तीन अत्याधुनिक बायोमेडिकल तकनीकों के लाइसेंस प्रमुख दवा और वैक्सीन निर्माता कंपनियों को सौंप दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य इन नई तकनीकों का विकास, निर्माण और व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करना है।

विज्ञापन

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बयान में इसे सरकारी फंड से हुई रिसर्च को आम लोगों के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने की एक बड़ी सफलता बताया है। इससे भारत के बायोमेडिकल नवाचार (इनोवेशन) को भी मजबूती मिलेगी।

कैंसर के इलाज की नई दवा

सौंपी गई तकनीकों में सबसे प्रमुख 'शेटा-2' (SHeTA-2) नामक एक नई दवा है। यह दवा गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) की कैंसर-पूर्व अवस्था के इलाज के लिए विकसित की गई है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के खिलाफ काम करती है। इसका लाइसेंस एमक्योर फ़ार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को दिया गया है।

इस दवा की खासियत यह है कि यह अपनी तरह का पहला लक्षित उपचार है। यह स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान पहुंचाए बिना केवल HPV से संक्रमित कैंसर-पूर्व और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को चुनकर नष्ट करती है। ICMR–राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (NICPR) के डॉ. शौकत हुसैन ने इसे अमेरिका के ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय के स्टीफेंसन कैंसर केंद्र की डॉ. डोरिस एम. बेनब्रुक के सहयोग से विकसित किया है। उम्मीद है कि यह तकनीक सर्वाइकल कैंसर के लिए एक सुरक्षित, किफायती और कम सर्जरी वाला इलाज उपलब्ध कराएगी।

संक्रमण रोकने वाली वैक्सीन तकनीकें

कैंसर की दवा के अलावा, आंतों में बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण से बचाने वाली दो अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों का लाइसेंस बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को दिया गया है। इन तकनीकों को ICMR–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स (NIRBI), कोलकाता में विकसित किया गया है।

इनमें से एक टाइफाइड से बचाव के लिए एक संभावित अगली पीढ़ी की वैक्सीन है, जिसमें साल्मोनेला टाइफी जीवाणु के बाहरी झिल्ली प्रोटीन का उपयोग किया गया है। दूसरी तकनीक एक ऐसी वैक्सीन से जुड़ी है जो साल्मोनेला टाइफी, साल्मोनेला पैराटाइफी और शिगेला जैसे कई जीवाणुओं से होने वाले आंतों के संक्रमण के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ये सभी तकनीकें भारत में अगली पीढ़ी की स्वदेशी दवाओं और टीकों के विकास को बढ़ावा देंगी।

इनपुट: IANS

N

News4Social टेक डेस्क

News4Social टेक डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से टेक्नोलॉजी से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →