मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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UNHRC में PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान का मुद्दा, मानवाधिकार हनन पर पाकिस्तान की घेराबंदी

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति का…

UNHRC में PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान का मुद्दा, मानवाधिकार हनन पर पाकिस्तान की घेराबंदी
(फोटो: IANS)

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया है। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इन इलाकों में हो रहे दमन और अत्याचारों की ओर खींचा है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, UKPNP के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी ने सोमवार को सत्र को संबोधित करते हुए 5 जून 2026 से PoK में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा किए जा रहे दमन पर गहरी चिंता जताई। अफ्रीकन डेवलपमेंट एसोसिएशन (ADA) के प्रतिनिधि के तौर पर बोलते हुए उन्होंने इलाके में बढ़ते सैन्यीकरण के साथ-साथ मौतों, बर्बरता, मनमानी गिरफ्तारियों और लोगों के लापता होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सरकारी दमन

शौकत अली ने इस बात पर जोर दिया कि PoK में शांतिपूर्ण सभाओं और संचार सेवाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्होंने परिषद से कहा, "शांतिपूर्ण असहमति आतंकवाद नहीं है और अधिकारों की मांग करना कोई अपराध नहीं है।" उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तुरंत बंद करे, सभी हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करे, लापता लोगों की जानकारी सार्वजनिक करे और पूरे PoK में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बिना किसी बाधा के बहाल करे।

यह मुद्दा पिछले हफ्ते भी UNHRC में उठा था, जब मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी। सामाजिक कार्यकर्ता हरलीन कौर ने बताया था कि PoK के लोग भोजन, बिजली, रोजगार और बेहतर बुनियादी ढांचे जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए महीनों से सड़कों पर हैं, लेकिन इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को क्रूरता से कुचला जा रहा है।

संसाधनों का शोषण और स्थानीय लोगों की उपेक्षा

गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) के मुद्दे पर सरदार शौकत अली ने कहा कि वहां राजनीतिक प्रतिनिधित्व, जमीन के मालिकाना हक और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़ी चिंताएं लंबे समय से बनी हुई हैं। हरलीन कौर ने भी इस बात को दोहराया था कि क्षेत्र से निकाले गए संसाधनों का लाभ बाहरी लोगों को मिल रहा है, जबकि स्थानीय लोग महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

वक्ताओं ने UNHRC से इन कथित उल्लंघनों की तत्काल, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे पाकिस्तान पर अपने मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालें। साथ ही, कब्जे वाले इलाकों में नागरिक अधिकारों की रक्षा और जवाबदेही तय करने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित करने की भी मांग की गई।

इनपुट: IANS

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