सोमवार, 20 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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विपक्ष का वॉकआउट: सरकार ने 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' को बुलाने का किया बचाव, कहा- '20 सांसदों को वंचित नहीं कर सकते'

संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) को बुलाने पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया। इस पर सरकार ने अपने…

विपक्ष का वॉकआउट: सरकार ने 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' को बुलाने का किया बचाव, कहा- '20 सांसदों को वंचित नहीं कर सकते'
(फोटो: IANS)

संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) को बुलाने पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया। इस पर सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 20 चुने हुए सांसदों को चर्चा से बाहर रखना सही नहीं है, भले ही विपक्ष को अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार हो।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, रिजिजू ने बताया कि 'इंडिया' ब्लॉक के वॉकआउट के बाद भी बैठक जारी रही। उन्होंने विपक्ष के इस कदम को एक औपचारिक विरोध बताया। रिजिजू ने कहा, "वह बहिष्कार कुछ समय के लिए था; यह औपचारिक था। मुझे नहीं लगता कि यह बुरा है क्योंकि उन्हें अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है।"

NCPI को क्यों मिला निमंत्रण?

केंद्रीय मंत्री ने NCPI को बुलाने के पीछे का तर्क समझाते हुए कहा कि यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास विचाराधीन है। उन्होंने कहा, "NCPI के 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और लोकसभा अध्यक्ष से नई पार्टी में शामिल होने और संसद में अलग बैठने की मांग की है। यह नियमों के अनुसार है।" रिजिजू ने सवाल उठाया, "जब यह मामला अध्यक्ष के विचाराधीन है और 20 सांसद हैं, तो हम उन्हें कैसे वंचित कर सकते हैं?"

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पार्टियों को आमंत्रित किया था और NCPI को कोई विशेष निमंत्रण नहीं भेजा गया था। रिजिजू के अनुसार, "वे लोकसभा सदस्य हैं, इसलिए उन्हें बुलाना ही होगा।"

बैठक में क्या हुआ?

इस सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के 40 फ्लोर लीडर्स शामिल हुए। उन्होंने मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर अपने विचार रखे। रिजिजू के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी दलों से राष्ट्रीय हित में मिलकर काम करने की अपील की, विशेषकर पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए।

सत्र में हंगामे पर सरकार का रुख

संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि जो भी पार्टी चर्चा की बजाय सिर्फ नारेबाजी करती है, उसे राजनीतिक नुकसान होता है। उन्होंने कहा, "अगर सत्र ठीक से चलता है, तो हर कोई अपनी बात रख पाएगा; लेकिन अगर वे हंगामा करते हैं, तो उन्हें बोलने का मौका नहीं मिलेगा।" उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि बाद में यह न कहा जाए कि कोई विधेयक कम चर्चा के बाद या हंगामे के बीच पारित कर दिया गया। रिजिजू ने बताया कि सरकार ने मानसून सत्र के लिए प्रस्तावित आठ बिलों की जानकारी पहले ही दे दी है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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