सड़क पर चलते ई-रिक्शा को ऐप से कर रहे थे बंद, सरकार ने BAT-BMS समेत 3 ऐप्स पर लगाया बैन
भारत सरकार ने चीन में बने BAT-BMS समेत तीन मोबाइल ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। यह कदम उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाय
भारत सरकार ने चीन में बने BAT-BMS समेत तीन मोबाइल ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है। यह कदम उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया कि कैसे इन ऐप्स का इस्तेमाल कर सड़क पर चलते ई-रिक्शा को दूर से ही बंद किया जा रहा था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दुरुपयोग से सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जिन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है, उनमें BAT-BMS के अलावा लॉसिगी (Lossigy) और एपोच आई-आयन (Epoch i-ion) भी शामिल हैं। ये ऐप्स ब्लूटूथ के ज़रिए लिथियम-आयन बैटरी से कनेक्ट हो जाते हैं।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
BAT-BMS ऐप को चीन की कंपनी शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने खास तौर पर ब्लूटूथ-आधारित लिथियम-आयन बैटरी की निगरानी के लिए बनाया था। इसका मकसद बैटरी मालिकों को वोल्टेज, करंट, तापमान और बैटरी की सेहत जैसी जानकारी रियल-टाइम में देना था। इसी ऐप में बैटरी के डिस्चार्ज फंक्शन को चालू या बंद करने का फीचर भी होता है, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा था।
समस्या उन ई-रिक्शा में आ रही थी, जिनमें ब्लूटूथ-आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) वाली लिथियम-आयन बैटरी लगी है और उनमें या तो पासवर्ड सुरक्षा नहीं है या फिर वे फैक्टरी की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स पर ही चल रही हैं। ऐसे में, कोई भी व्यक्ति 10 से 20 मीटर के दायरे में आकर इन ऐप्स के ज़रिए ई-रिक्शा की बैटरी बंद कर सकता था।
ड्राइवरों की परेशानी
एक ई-रिक्शा ड्राइवर ने IANS को बताया कि कुछ दिन पहले उसकी गाड़ी अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई। उसने कहा, "शुरू में हमें लगा कि गाड़ी में कोई खराबी है और हम उसे मैकेनिक के पास ले गए। जांच करने के बाद, उसने बताया कि कोई मैकेनिकल समस्या नहीं है। उसने कहा कि किसी ने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके बैटरी बंद कर दी थी।"
ड्राइवर के अनुसार, मैकेनिक ने बैटरी को फिर से चालू करने के लिए 300 रुपये लिए। उसने बताया, "उन्होंने अपने फोन पर ऐप खोला, बैटरी को फिर से चालू किया और गाड़ी दोबारा चलने लगी।" ड्राइवर ने दावा किया कि यात्रियों को ले जाते समय यह घटना दोबारा हुई। उसने कहा, "जब मैं सड़क पर था, तो किसी ने इसे फिर से बंद कर दिया। हमें नहीं पता कि ऐसा कौन कर रहा है।" उसने यह भी बताया कि अगर बैटरी लॉक हो जाए तो उसे सिर्फ़ उसी ऐप से खोला जा सकता है, जो ड्राइवरों के लिए एक बड़ी समस्या है क्योंकि वे तकनीक के विशेषज्ञ नहीं हैं।
कौन से वाहन सुरक्षित हैं?
यह खतरा केवल उन्हीं वाहनों तक सीमित है जिनमें ब्लूटूथ-आधारित BMS वाली असुरक्षित लिथियम-आयन बैटरी लगी है। भारत में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा अभी भी लेड-एसिड बैटरी पर चलते हैं, जिनमें यह समस्या नहीं है। इसके अलावा, नए और आधुनिक लिथियम-आयन बैटरी सिस्टम, जिनमें मज़बूत पासवर्ड और एन्क्रिप्शन होता है, वे भी इस तरह के अनाधिकृत एक्सेस से सुरक्षित हैं। यात्री कारों और ब्रांडेड इलेक्ट्रिक वाहनों में कई स्तरों की साइबर-सुरक्षा होती है, जिससे उन्हें हैक करना बेहद मुश्किल होता है।
इनपुट: IANS



