हिमाचल प्रदेश: पांगी घाटी बनी प्राकृतिक खेती का मॉडल, सरकार ने सतत विकास की दिशा में बताया बड़ा कदम
हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पांगी घाटी अब राज्य का पहला 'प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल' बन गई है। प्रदेश सरकार ने इस पहल को रसायन-मुक्त कृषि और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण…
हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पांगी घाटी अब राज्य का पहला 'प्राकृतिक खेती मॉडल उपमंडल' बन गई है। प्रदेश सरकार ने इस पहल को रसायन-मुक्त कृषि और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस परियोजना को सफल बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी उपलब्ध करा रही है।
प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने विशेष रूप से प्राकृतिक तरीके से उगाई गई जौ (बार्ले) के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी तय किया है। यह कदम किसानों को पारंपरिक तरीकों से हटकर पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर आकर्षित करने में मदद करेगा।
जनजातीय क्षेत्रों में विकास पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती का विस्तार करने का लक्ष्य रखती है। ये इलाके अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कम आबादी और लंबी सर्दियों के लिए जाने जाते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ये अनुसूचित जनजाति क्षेत्र राज्य के कुल भूभाग का 42.49% हिस्सा हैं, जबकि यहां राज्य की कुल आबादी का केवल 5.71% (3.92 लाख लोग) निवास करता है। यहां जनसंख्या घनत्व मात्र 7 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के औसत 123 से काफी कम है। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने इन क्षेत्रों में 100% विद्युतीकरण और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने का दावा किया है।
बजट और अन्य कल्याणकारी योजनाएं
प्रदेश सरकार हर साल अपने कुल विकास बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा जनजातीय उपयोजना (STP) के तहत इन क्षेत्रों के लिए आवंटित करती है। वर्ष 2024-25 के लिए इस मद में 890.28 करोड़ रुपये और 2025-26 के लिए 638.73 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण निवेश किया है। जनजातीय क्षेत्रों में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए, 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के तहत 3,234 जनजातीय महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और पात्र महिलाओं को 'इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना' के तहत 1,500 रुपये की मासिक सहायता दी जा रही है।
इनपुट: IANS



