हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत पर CAG की चिंताजनक रिपोर्ट, राजस्व का बड़ा हिस्सा वेतन-पेंशन में खर्च
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति एक चिंताजनक मोड़ पर है, जहाँ राज्य के कुल राजस्व का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे निर्धारित खर्चों में ही चला जाता है। इसके चलते राज्य के पास…
हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति एक चिंताजनक मोड़ पर है, जहाँ राज्य के कुल राजस्व का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और सब्सिडी जैसे निर्धारित खर्चों में ही चला जाता है। इसके चलते राज्य के पास ढाँचागत विकास और पूंजीगत निवेश जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए बहुत कम पैसा बच रहा है। यह खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की उस रिपोर्ट में हुआ है, जिसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में पेश किया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 की इस कैग रिपोर्ट में राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ और वित्तीय अनुशासन के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विकासात्मक कार्यों के लिए राजस्व का केवल 14 प्रतिशत हिस्सा ही उपलब्ध है, जो राज्य में बुनियादी ढाँचे के निर्माण और दीर्घकालिक निवेश के सामने एक बड़ी चुनौती है।
घाटे और देनदारियों की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत तय लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही है। हिमाचल प्रदेश का राजकोषीय घाटा बढ़कर 12,611.05 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 5.44 प्रतिशत है। यह FRBM द्वारा निर्धारित सीमा का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा, राज्य का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपए रहा। राज्य पर कुल बकाया देनदारियाँ भी 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित लक्ष्यों से काफी अधिक हैं।
राजस्व और अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन
कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने 2024-25 के दौरान 9.20 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की। राज्य की राजस्व प्राप्तियों में 4.34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसमें GST संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी का योगदान रहा। गैर-कर राजस्व में भी 22.40 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
हालांकि, इन सुधारों के बावजूद कैग ने इस बात पर जोर दिया कि हिमाचल प्रदेश अभी भी केंद्र से मिलने वाले अनुदान पर बहुत अधिक निर्भर है। राष्ट्रीय लेखा परीक्षक ने इस पर भी चिंता जताई कि भारत की कुल जीडीपी में राज्य का योगदान केवल 0.70 प्रतिशत है और पिछले पाँच वर्षों में इसमें लगातार गिरावट आई है।
धन प्रबंधन में अनियमितताएँ
कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी धन के प्रबंधन में कुछ अनियमितताओं को भी उजागर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिल्क सेस, एनवायरनमेंट सेस और बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर सेस जैसे कई शुल्कों से एकत्र की गई राशि को सरकारी खाते से बाहर रखा गया था। बिजली सब्सिडी और ऋण राहत जैसे उपायों पर बढ़ते खर्च को भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डालने वाला बताया गया है।
इनपुट: IANS



