रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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एक साल में 11% टूटा निफ्टी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव बने बड़ी वजह

पिछले एक साल में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव साफ तौर पर हावी रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवरात्रि 2025 से नवरात्रि 2026 की अवधि के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में 11…

एक साल में 11% टूटा निफ्टी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव बने बड़ी वजह
(फोटो: IANS)

पिछले एक साल में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव साफ तौर पर हावी रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवरात्रि 2025 से नवरात्रि 2026 की अवधि के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी में 11 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई है जब देश की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है और घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर रहे हैं।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमजोरी के पीछे बाहरी कारक मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपए में कमजोरी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और सबसे बढ़कर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने बाजार की चाल बिगाड़ दी। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने साल 2026 में अब तक भारतीय बाजारों से 3.04 लाख करोड़ रुपए निकाले हैं, जबकि 2025 में भी उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की थी।

कौन से शेयर सबसे ज्यादा गिरे?

इस एक साल की अवधि में निफ्टी 50 में शामिल 31 शेयरों ने निवेशकों को नकारात्मक रिटर्न दिया। यानी आधे से ज्यादा शेयरों के दाम गिरे। सबसे ज्यादा नुकसान आईटीसी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, इंफोसिस, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के निवेशकों को हुआ, जिनके शेयरों में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा एचडीएफसी लाइफ, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे बड़े नामों में भी 22 से 29 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। कुल मिलाकर निफ्टी के करीब 20 शेयरों में 12% से ज्यादा की गिरावट रही।

बाजार के विपरीत चमके कुछ शेयर

हालांकि, बाजार के इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी कुछ कंपनियों के शेयर मजबूती से खड़े रहे। श्रीराम फाइनेंस इस अवधि में टॉप गेनर बनकर उभरा और इसके शेयर में लगभग 49 प्रतिशत की शानदार तेजी दर्ज की गई। इसी तरह, टाइटन कंपनी, अदाणी पोर्ट्स और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी 21 से 27 प्रतिशत तक का उछाल आया। नेस्ले इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और एक्सिस बैंक ने भी 10 प्रतिशत से अधिक का सकारात्मक रिटर्न देकर निवेशकों को राहत दी।

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?

विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में बाजार एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। निवेशकों की नजरें कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी रहेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे मजबूत रहने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक आर्थिक चिंताएं बाजार में किसी भी बड़ी और टिकाऊ तेजी को रोक सकती हैं। बाजार में सुधार तभी संभव है जब तेल की कीमतें स्थिर हों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नरम पड़े और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमे।

इनपुट: IANS

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