अमेरिकी जांच रिपोर्ट का दावा: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय सुरक्षा की बजाय चीन से रिश्तों को दी प्राथमिकता
अमेरिकी कांग्रेस की एक जांच में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व में हुई इस जांच की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को…
अमेरिकी कांग्रेस की एक जांच में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपब्लिकन पार्टी के नेतृत्व में हुई इस जांच की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को नजरअंदाज करते हुए चीन के साथ अपने फायदेमंद रिश्तों को तरजीह दी। 53 पन्नों की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हार्वर्ड ने चीन की सेना और मानवाधिकारों के हनन से जुड़ी संस्थाओं के साथ भी शोध संबंध बनाए रखे।
यह जांच हाउस सेलेक्ट कमेटी ऑन चाइना और हाउस एजुकेशन एंड वर्कफोर्स कमेटी द्वारा की गई थी। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस जांच के लिए कमेटियों ने हार्वर्ड और चीनी सरकार के हजारों पन्नों के दस्तावेजों की समीक्षा की, यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों से बात की और कई गवाहों के बयान भी दर्ज किए।
जांच के मुख्य आरोप
रिपोर्ट, जिसका शीर्षक "कॉम्प्रोमाइज्ड इंडिपेंडेंस: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में सीसीपी का प्रभाव" है, में कई चिंताजनक बातें सामने आई हैं। इसमें कहा गया है कि हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने चीन के रक्षा अनुसंधान और औद्योगिक आधार से जुड़ी यूनिवर्सिटीज के विद्वानों के साथ मिलकर काम किया। कुछ शोध रोबोटिक्स जैसे दोहरे उपयोग वाले क्षेत्रों से संबंधित थे, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
जांच में हार्वर्ड ग्लोबल नामक एक सहयोगी गैर-लाभकारी संस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। कमेटियों ने आरोप लगाया कि इसे फंडिंग को दूसरी तरफ मोड़ने के लिए बनाया गया था, खासकर उन मामलों में जहां यूनिवर्सिटी कानूनी या वित्तीय कारणों से किसी प्रायोजक की शर्तें स्वीकार नहीं कर सकती थी। एजुकेशन एंड वर्कफोर्स कमेटी के चेयरमैन टिम वालबर्ग ने कहा, "हार्वर्ड ने विदेशी फंडिंग की जानकारी देने वाले संघीय कानूनों से बचने की साफ कोशिश में एक संस्था बनाई।"
विवादित कार्यक्रम और वित्तीय अनियमितताएं
रिपोर्ट में हार्वर्ड के 'चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' द्वारा आयोजित एक एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम का भी जिक्र है। इसमें आशंका जताई गई है कि इस कार्यक्रम में 'शिनजियांग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स' के सदस्य शामिल हो सकते हैं, जो एक चीनी अर्धसैनिक संगठन है और जिस पर अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने प्रतिबंध लगाया हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी मानती है कि इसमें शामिल लोगों के बारे में सबूत स्पष्ट नहीं थे।
सेलेक्ट कमेटी के चेयरमैन जॉन मूलनार ने कहा, "अमेरिकी लोग उम्मीद करते हैं कि हमारे देश की प्रमुख यूनिवर्सिटीज अमेरिकी रिसर्च और इनोवेशन की रक्षा करेंगी और कभी भी हमारे देश के दुश्मनों के हितों को आगे नहीं बढ़ाएंगी। अभी, हार्वर्ड इस उम्मीद पर खरा उतरने में नाकाम हो रहा है।" उन्होंने कहा कि अब यूनिवर्सिटी को और गलतियां रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। रिपोर्ट के ड्राफ्ट पर हार्वर्ड की कोई नई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दस्तावेजों में शामिल नहीं थी।
इनपुट: IANS



