गुजरात: अब डिजिटल प्रमाणपत्रों पर ही लगेगी सरकारी मुहर, दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
गुजरात में अब लोगों को डिजिटल माध्यम से जारी हुए प्रमाणपत्रों पर मुहर लगवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है, जिसके तह…
गुजरात में अब लोगों को डिजिटल माध्यम से जारी हुए प्रमाणपत्रों पर मुहर लगवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत ऑनलाइन जारी होने वाले सभी दस्तावेजों पर जारी करने वाले अधिकारी की गोल मुहर और कार्यालय का विवरण डिजिटल रूप से ही अंकित होगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार ने यह कदम प्रशासनिक सुधारों के तहत उठाया है, जिसका मकसद नागरिकों के लिए सेवाओं को आसान बनाना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 21 अक्टूबर को इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया। इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ समन्वय कर एक ऐसी प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया गया है, जो डिजिटल प्रमाणपत्रों पर आधिकारिक मुहर को स्वतः प्रदर्शित कर सके।
क्यों पड़ी इस बदलाव की ज़रूरत?
मौजूदा व्यवस्था में, गुजरात के डिजिटल पोर्टलों से मिलने वाले ई-प्रमाणपत्रों पर आधिकारिक मुहर नहीं होती थी। इस वजह से, नागरिकों को प्रमाणपत्र डाउनलोड करने के बाद भी उसे सत्यापित कराने और मुहर लगवाने के लिए संबंधित सरकारी कार्यालय जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में न केवल अतिरिक्त समय और मेहनत लगती थी, बल्कि ऑनलाइन सेवा का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाता था।
'डिजिटल गुजरात 2.0' की दिशा में बड़ा कदम
यह पहल राज्य सरकार के 'डिजिटल गुजरात 2.0' अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य 'डिजिटल-बाय-डिफॉल्ट' दृष्टिकोण अपनाकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सेवा वितरण को पूरी तरह से ऑनलाइन करना है। इसके लिए सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन (GPR) और व्यावसायिक प्रक्रिया पुनर्गठन (BPR) जैसी पहल भी शुरू की गई हैं।
नई व्यवस्था के फायदे:
इस बदलाव से न सिर्फ नागरिकों का कीमती समय बचेगा, बल्कि अनावश्यक कागजी कार्रवाई भी कम होगी। सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल रूप से जारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता और पहचान भी अधिक स्पष्ट होगी, जिससे आवेदकों के लिए अतिरिक्त औपचारिकताएं खत्म हो जाएंगी। यह कदम पूरी तरह से कागज रहित शासन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।
इनपुट: IANS



