गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 8 मौतें, स्वास्थ्य विभाग ने उठाए कड़े कदम
गुजरात में इस साल चांदीपुरा वायरस एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है, जिसके चलते अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 12 मामलों की…
गुजरात में इस साल चांदीपुरा वायरस एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है, जिसके चलते अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 12 मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि 63 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए संक्रमित मरीजों की यात्रा और बीमारी से जुड़ी जानकारी की गहन जांच करने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, जांच के लिए भेजे गए 63 संदिग्ध सैंपल में से 55 की रिपोर्ट आ चुकी है, जिनमें 12 पॉजिटिव पाए गए। 8 सैंपल की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है।
कहां कितने मामले और क्या है स्थिति?
पुष्ट मामलों में से 9 मरीज गुजरात के हैं, जबकि 3 पड़ोसी राज्य राजस्थान के निवासी हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने जिलेवार आंकड़े देते हुए बताया कि पंचमहल और खेड़ा में दो-दो मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा साबरकांठा, मेहसाणा, भरूच, भावनगर और अहमदाबाद नगर निगम क्षेत्र में एक-एक पुष्ट मामला मिला है। सभी 63 संदिग्ध मरीजों को मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों या मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है और उनके सैंपल गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भेजे गए हैं।
सरकार के रोकथाम के उपाय
वायरस फैलाने वाले कीड़ों, विशेषकर रेत मक्खियों (Sandflies) पर नियंत्रण के लिए सरकार ने प्रभावित इलाकों में धूल और दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है। रैपिड रिस्पांस टीमें हर संदिग्ध मामले की जांच कर रही हैं। मंत्री ने कहा, "किसी क्षेत्र में एक भी मामला सामने आने के बाद उस इलाके में गहन निगरानी जरूरी हो जाती है।" इसके साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए सूचना और शिक्षा अभियान भी चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कच्चे घरों और पशु बाड़ों के आसपास बड़े पैमाने पर छिड़काव हो रहा है, क्योंकि इन्हीं कीड़ों से वायरस फैलने की आशंका है।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
इस वायरस की पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। यह मुख्य रूप से रेत मक्खियों से फैलता है और इसका असर 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर ज्यादा होता है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पनशेरिया ने बताया कि यह वायरस मानसून के मौसम में और सितंबर तक अधिक सक्रिय रहता है। इसके लक्षणों में अचानक तेज बुखार, उल्टी, दौरे पड़ना और बेहोशी शामिल हैं, जो गंभीर स्थिति में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम का रूप ले सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में ऐसे लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।
इनपुट: IANS



