गुजरात: 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' के तहत 28 दिन में 42 लापता बच्चे परिवारों से मिले
गुजरात में पुलिस ने तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए एक महीने से भी कम समय में 42 लापता बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया है। 1 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चले 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस'…
गुजरात में पुलिस ने तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए एक महीने से भी कम समय में 42 लापता बच्चों को ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया है। 1 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चले 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' के दौरान सीसीटीवी एनालिटिक्स और आधुनिक साइबर उपकरणों की मदद से यह सफलता हासिल की गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डिजिटल दुनिया में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करना था।
यह राज्यव्यापी अभियान गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व और पुलिस महानिदेशक (DGP) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक की देखरेख में शुरू किया गया था। अभियान के तहत न सिर्फ लापता बच्चों को खोजा गया, बल्कि साइबर जागरूकता फैलाने और साइबर अपराधों की जांच में सुधार लाने पर भी जोर दिया गया।
तकनीक से मिली कामयाबी
इस अभियान की सफलता का एक उदाहरण आनंद जिले के खंभात का है। यहां 7वीं कक्षा की एक छात्रा स्कूल के लिए घर से निकली, लेकिन वहां नहीं पहुंची। जब क्लास टीचर ने परिवार को सूचित किया, तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने 'विश्वास फेज-2' सीसीटीवी नेटवर्क और अन्य डिजिटल निगरानी साधनों का उपयोग करके कुछ ही घंटों के भीतर छात्रा को उसकी साइकिल समेत सुरक्षित ढूंढ निकाला और परिवार को सौंप दिया। पुलिस ने बताया कि यह मामला उन 42 सफल रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक था, जिन्हें तकनीक की मदद से अंजाम दिया गया।
क्या है 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस'?
सीआईडी क्राइम (महिला सेल) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजय चौधरी ने बताया, "डीजीपी के मार्गदर्शन में गुजरात पुलिस ने साइबर जागरूकता बढ़ाने, बचाव के उपायों को मजबूत करने, साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और साइबर स्पेस में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर खास ध्यान देते हुए साइबर अपराध की जांच की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए पूरे राज्य में 'ऑपरेशन सुरक्षित साइबर स्पेस' शुरू किया।"
चौधरी के अनुसार, सीआईडी क्राइम और रेलवे द्वारा संचालित इस अभियान में राज्य के सभी पुलिस थानों ने सक्रिय भागीदारी की। इसका उद्देश्य केवल लापता बच्चों को ढूंढना ही नहीं, बल्कि आम लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल सुरक्षा और इंटरनेट के जिम्मेदार उपयोग के बारे में शिक्षित करना भी था। इसके लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम और सोशल मीडिया अभियान भी चलाए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल दिखाती है कि गुजरात पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के लिए तकनीक का किस तरह प्रभावी इस्तेमाल कर रही है।
इनपुट: IANS



