गुजरात: डेढ़ करोड़ की साइबर ठगी में बड़ा खुलासा, कॉर्पोरेट खाते मुहैया कराने वाले दो गिरफ्तार
गुजरात में साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस के 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत मेहसाणा जिले से दो…
गुजरात में साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस के 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत मेहसाणा जिले से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर साइबर जालसाजों के लिए बैंक खातों का इंतजाम करने का आरोप है।
पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने बताया कि इन खातों का इस्तेमाल कई राज्यों में करीब 1.5 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मेहसाणा के विसनगर निवासी पार्थ बारोट और रमेश कुमार लवाणा के रूप में हुई है। उन्हें विसनगर से पकड़ने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच के मुताबिक, बारोट और लवाणा लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल करते थे। गिरोह की खास मांग उन कॉर्पोरेट या व्यावसायिक खातों की थी, जिनमें 'बल्क मोड' की सुविधा होती है। इस सुविधा से एक साथ बड़ी संख्या में लेनदेन किए जा सकते हैं, जो सामान्य बचत खातों में नहीं मिलती।
आरोपी खाताधारकों से उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक और एटीएम कार्ड की तस्वीरें ले लेते थे। इसके साथ ही वे इंटरनेट बैंकिंग का आईडी और पासवर्ड भी हासिल कर लेते थे। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह खाताधारकों के फोन में एक एपीके (APK) फाइल भी इंस्टॉल करवा देता था, ताकि लेनदेन के लिए ओटीपी की जरूरत ही न पड़े।
अब तक 8 लोग गिरफ्तार
यह जानकारी साइबर ठगों के गिरोह को सौंप दी जाती थी, जो इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए करते थे। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में पहले भी छह अन्य आरोपी पकड़े जा चुके हैं। अब बारोट और लवाणा की गिरफ्तारी के बाद कुल संख्या आठ हो गई है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और मामले में भारतीय न्याय संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
इनपुट: IANS



